वादे बहुत हुए, अब सिहोरा जिला कब बनेगा?“सब कहते हैं सिहोरा जिला के साथ, फिर धरातल पर प्रयास क्यों नहीं?”—आंदोलन समिति का सियासी नेतृत्व से सीधा सवाल
कलयुग की कलम से राकेश यादव

वादे बहुत हुए, अब सिहोरा जिला कब बनेगा?“सब कहते हैं सिहोरा जिला के साथ, फिर धरातल पर प्रयास क्यों नहीं?”—आंदोलन समिति का सियासी नेतृत्व से सीधा सवाल
कलयुग की कलम सिहोरा – सिहोरा को जिला बनाने की मांग को लेकर लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में रविवार को समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जनपद पंचायत सिहोरा की अध्यक्ष श्रीमती रश्मि मनेन्द्र अग्निहोत्री के निवास पहुंचकर उन्हें स्मरण पत्र सौंपा। इस दौरान जनपद अध्यक्ष ने भी नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा हाल ही में कही गई बात की पुष्टि करते हुए बताया कि नवंबर 2024 में ही सिहोरा को जिला बनाने का प्रस्ताव जनपद पंचायत में पारित कर शासन को भेजा जा चुका है।
समिति ने सवाल उठाया कि जब स्थानीय निकाय स्तर से प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा जा चुका है और क्षेत्र के अधिकांश राजनीतिक दलों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा सिहोरा जिला की मांग का समर्थन किया जाता है, तो फिर जिला गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर ठोस राजनीतिक पहल क्यों नहीं दिखाई दे रही है?
आश्वासन के बाद भी क्यों नहीं बदली तस्वीर?
आंदोलन समिति के सदस्यों ने कहा कि सिहोरा जिला की मांग कोई नई मांग नहीं है। समिति इससे पहले भी सत्ता समर्थक नेताओं के घर घंटा बजाकर उन्हें सिहोरा जिला के वादे की याद दिला चुकी है। उस दौरान भी नेताओं ने हरसंभव सहयोग और प्रयास का भरोसा दिलाया था, लेकिन समय बीतने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
समिति का कहना है कि जनता अब केवल आश्वासन सुनने के बजाय जिला गठन की दिशा में वास्तविक और निर्णायक कार्रवाई देखना चाहती है।
जिला घोषणा के मंच पर मौजूद थीं जनपद अध्यक्ष
समिति ने विधानसभा चुनाव से पूर्व सिहोरा को जिला बनाने की घोषणा के समय की परिस्थितियों को भी याद दिलाया। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी द्वारा सिहोरा को जिला बनाने की घोषणा किए जाने के बाद क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी थी कि अब सिहोरा को जिला बनाने का रास्ता जल्द साफ होगा।
समिति का कहना है कि सरकार बनने के बाद काफी समय गुजर चुका है, लेकिन जिला गठन को लेकर अभी तक कोई निर्णायक पहल सामने नहीं आई है। समिति ने सवाल किया कि जब जनपद और नगर निकाय स्तर से प्रस्ताव शासन तक पहुंच चुका है तथा जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से मांग के समर्थन की बात कहते हैं, तो फिर प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
“चुनाव में बढ़ता समर्थन, फिर सिहोरा की मांग पर चुप्पी क्यों?”
आंदोलन समिति ने कहा कि सिहोरा क्षेत्र को लंबे समय से भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता है। चुनाव दर चुनाव पार्टी को मिलने वाले समर्थन के बावजूद जिला बनाने की मांग पर अपेक्षित गंभीरता और सक्रियता दिखाई नहीं देने को लेकर क्षेत्र की जनता में सवाल उठ रहे हैं।
समिति ने स्पष्ट किया कि सिहोरा की जनता अब सिर्फ राजनीतिक वादों और आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। लोगों की मांग है कि जिला गठन की दिशा में सरकार और राजनीतिक नेतृत्व ठोस कदम उठाए तथा जनता को स्थिति स्पष्ट की जाए।
आज राजेश दाहिया और अनुपम सराफ के निवास पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल
समिति ने बताया कि स्मरण पत्र अभियान आगे भी जारी रहेगा। सोमवार को भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल राजेश दाहिया और अनुपम सराफ के निवास पर प्रतिनिधिमंडल पहुंचकर स्मरण पत्र सौंपेगा।
समिति का कहना है कि अभियान के माध्यम से सत्ता समर्थक प्रमुख नेताओं को सिहोरा जिला के पुराने वादे की याद दिलाते हुए शासन स्तर पर प्रभावी पहल करने की मांग की जाएगी।
रविवार को स्मरण पत्र सौंपने के दौरान समिति के कृष्ण कुमार कुररिया, अनिल जैन, विकास दुबे, रामजी शुक्ला, संतोष वर्मा, संजय पाठक, शरद सेठ, मोहन सोंधिया, संतोष पांडे, जितेंद्र श्रीवास, राजभान मिश्रा, राजा ठाकुर, मानस तिवारी, अमित बक्शी, आलोक जैन, सुनील कुररिया, सुमित शुक्ला, मुन्ना उपाध्याय सहित अनेक सिहोरा वासी उपस्थित रहे।



