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महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय की बढ़ीं मुश्किलें, जांच कमेटी के आदेश से मचा हड़कंप,उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने शिकायतों की विस्तृत जांच के दिए निर्देश; विश्वविद्यालय के विधिक दर्जे से लेकर नियुक्तियों और पाठ्यक्रमों तक उठे सवाल

कलयुग की कलम से राकेश यादव

महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय की बढ़ीं मुश्किलें, जांच कमेटी के आदेश से मचा हड़कंप,उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने शिकायतों की विस्तृत जांच के दिए निर्देश; विश्वविद्यालय के विधिक दर्जे से लेकर नियुक्तियों और पाठ्यक्रमों तक उठे सवाल

कलयुग की कलम भोपाल/उमरिया पान – महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय करौंदी से जुड़ी कथित अनियमितताओं और विभिन्न शिकायतों का मामला अब शासन स्तर पर गंभीरता से लिया गया है। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालय के संबंध में प्राप्त शिकायतों की विस्तृत जांच के लिए विशेष कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री के निर्देश के बाद उच्च शिक्षा विभाग में इस मामले को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय से संबंधित विभिन्न शिकायतों में कई गंभीर बिंदु उठाए गए हैं। इन शिकायतों की वास्तविकता और तथ्यों की जांच के लिए कमेटी गठित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। अब जांच समिति के गठन और उसकी कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हैं।

पहले भी जांच के निर्देश दिए जाने का दावा

मामले में यह भी जानकारी सामने आई है कि करीब 5 से 6 माह पहले विश्वविद्यालय से संबंधित शिकायतों की जांच को लेकर विभागीय स्तर पर फाइल आगे बढ़ाई गई थी। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि उस समय भी जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन मामले में अपेक्षित कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

अब उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा दोबारा सख्त रुख अपनाते हुए जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने फिर से जोर पकड़ लिया है। हालांकि, पूर्व में फाइल पर क्या कार्रवाई हुई और वह किस स्तर पर लंबित रही, इसका वास्तविक तथ्य जांच प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

शिकायतों में उठाए गए हैं ये प्रमुख सवाल

सागर निवासी सुधाकर सिंह राजपूत द्वारा विश्वविद्यालय से संबंधित विभिन्न मामलों को लेकर शासन स्तर पर शिकायतें किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतों में मुख्य रूप से—विश्वविद्यालय के विधिक स्टेटस एवं संचालन की वैधानिकता से जुड़े सवाल।

अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप।

कुछ अधिकारियों की शैक्षणिक डिग्रियों की प्रामाणिकता की जांच की मांग।

आवश्यक स्वीकृति एवं मान्यता से जुड़े पाठ्यक्रमों के संचालन पर सवाल।

विश्वविद्यालय प्रबंधन के कुछ निर्णयों एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं में नियमों के पालन को लेकर आपत्तियां।

शिकायतकर्ता द्वारा इन बिंदुओं के संबंध में शासन के समक्ष दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने का दावा किया गया है। अब जांच कमेटी के गठन के बाद इन आरोपों एवं दावों की तथ्यात्मक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी

उच्च शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच समिति में किन अधिकारियों को शामिल किया जाता है और समिति अपनी रिपोर्ट कब तक शासन को सौंपती है। जांच के दौरान शिकायतों में लगाए गए आरोपों, विश्वविद्यालय के दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के पक्ष की भी पड़ताल की जा सकती है।

फिलहाल, जांच के आदेश को विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में शासन की गंभीरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय होने की स्थिति स्पष्ट होगी।

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