आजादी पर्व पर जश्न भी मनाएंगे लंबित मांगों को लेकर आत्मदाह भी करेंगे,उमरिया पान बस स्टैंड पर शाम 4:30 बजे आत्मदाह की घोषणा, क्षेत्रीय मांगों की अनदेखी से नाराज समाजसेवी चंद्रकांत ‘चंदू’ चौरसिया ने शासन-प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
कलयुग की कलम से राकेश यादव

आजादी पर्व पर जश्न भी मनाएंगे लंबित मांगों को लेकर आत्मदाह भी करेंगे,उमरिया पान बस स्टैंड पर शाम 4:30 बजे आत्मदाह की घोषणा, क्षेत्रीय मांगों की अनदेखी से नाराज समाजसेवी चंद्रकांत ‘चंदू’ चौरसिया ने शासन-प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
कलयुग की कलम उमरिया पान – आजादी के पावन पर्व पर जहां उमरिया पान के न्यू बस स्टैंड में देशभक्ति और आजादी का जश्न मनाने की तैयारियां हैं, वहीं क्षेत्रीय समस्याओं और लंबित जनमांगों को लेकर समाजसेवी चंद्रकांत ‘चंदू’ चौरसिया द्वारा आत्मदाह की चेतावनी दिए जाने से प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
श्री चंद्रकांत चौरसिया का कहना है कि क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं और मांगों को लेकर पूर्व में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया था। ज्ञापन के माध्यम से समस्याओं के समयबद्ध निराकरण की मांग की गई थी, लेकिन उनका आरोप है कि लंबे समय के बाद भी मांगों पर न तो अपेक्षित चर्चा हुई और न ही उनके समाधान के लिए शासन प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल सामने आई।
उन्होंने कहा कि लगातार मांगों की अनदेखी से क्षेत्र के लोगों में निराशा और आक्रोश है। इसी के विरोध में उन्होंने आजादी के पर्व पर एक ओर देश की स्वतंत्रता का जश्न मनाने और दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराने की घोषणा की है।
श्री चौरसिया ने बताया कि उमरिया पान न्यू बस स्टैंड में कल शाम आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान वे अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने आत्मदाह करने की चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर शासन-प्रशासन द्वारा गंभीरता से पहल नहीं की गई तो वे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
प्रशासन के लिए बनी गंभीर चुनौती
आत्मदाह की चेतावनी की सूचना के बाद यह मामला प्रशासन के लिए बेहद संवेदनशील बन गया है। ऐसे में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जनसमस्याओं का समाधान बातचीत और संवैधानिक तरीके से होना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन चंद्रकांत चौरसिया की मांगों पर क्या पहल करता है और शाम के कार्यक्रम से पहले उनसे संवाद कर स्थिति को सामान्य बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। आजादी के जश्न के बीच उठी यह चेतावनी अब शासन-प्रशासन की तत्परता की परीक्षा बन गई है।



