तीन माह से अटकी पेंशन: विधवा, दिव्यांग और बुजुर्गों का जीवन संकट में, जरूरतमंद बुजुर्गों के जीवन यापन पर सीधा असर
कलयुग की कलम से राकेश यादव

तीन माह से अटकी पेंशन: विधवा, दिव्यांग और बुजुर्गों का जीवन संकट में, जरूरतमंद बुजुर्गों के जीवन यापन पर सीधा असर
कलयुग की कलम उमरियापनउमरिया पान सिलौंडी– क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के हितग्राहियों को पिछले तीन महीनों से राशि नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। वृद्ध, विधवा और दिव्यांगजन अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह इस पेंशन पर निर्भर हैं, ऐसे में भुगतान में देरी ने उनकी जिंदगी को कठिन बना दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, कई हितग्राही लगातार बैंक और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें यही जवाब मिलता है कि “शासन स्तर से राशि जारी नहीं हुई है।” इस आश्वासन के बीच जरूरतमंदों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
जमीनी हालात: उम्मीद और निराशा के बीच संघर्ष
स्थानीय निवासी अर्जुन कोल ने बताया कि गांव में बड़ी संख्या में पात्र हितग्राही हैं, जिन्हें पिछले तीन महीनों से पेंशन नहीं मिली। 80 वर्षीय कुसुम बाई और दिव्यांग सुरेश पटेल जैसे कई लोग हर सप्ताह बैंक पहुंचकर अपनी पेंशन की स्थिति जानने की कोशिश करते हैं, लेकिन खाली हाथ लौटना उनकी मजबूरी बन गई है।
जीवन यापन पर सीधा असर
पेंशन ही कई बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए आय का एकमात्र साधन है। इससे वे दवा, राशन और अन्य आवश्यक खर्च पूरे करते हैं। भुगतान रुकने से दवाइयों का अभाव, उधारी का बोझ और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
नियम क्या कहते हैं?
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत शासन द्वारा पात्र हितग्राहियों को हर माह निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है।
पेंशन का नियमित मासिक भुगतान अनिवार्य है।
भुगतान में अनावश्यक देरी प्रशासनिक लापरवाही मानी जाती है।
पात्र हितग्राहियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना शासन की जिम्मेदारी है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से भुगतान रुका है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही लंबित राशि को तत्काल जारी कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
शासन-प्रशासन से अपील
प्रभावित हितग्राहियों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि लंबित पेंशन राशि को जल्द से जल्द उनके खातों में डाली जाए। साथ ही भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो, इसके लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पेंशन जैसी बुनियादी सहायता में देरी केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन पर सीधा प्रहार है। समय पर समाधान नहीं होने पर यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार तंत्र कब तक इन आवाजों को सुनकर राहत पहुंचाता है।



