जल है तो कल है और वन है तो जीवन है। ढीमरखेड़ा “न्यायालय बना हरियाली का प्रहरी: एक पौधा, हजार उम्मीदों की शुरुआत,माननीय न्यायाधीश पूर्वी तिवारी की प्रेरक पहल—पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़ता न्यायालय”
कलयुग की कलम से राकेश यादव

जल है तो कल है और वन है तो जीवन है। ढीमरखेड़ा “न्यायालय बना हरियाली का प्रहरी: एक पौधा, हजार उम्मीदों की शुरुआत,माननीय न्यायाधीश पूर्वी तिवारी की प्रेरक पहल—पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़ता न्यायालय”
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – पर्यावरण संरक्षण को लेकर न्यायिक व्यवस्था से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश सामने आया है। व्यवहार न्यायालय ढीमरखेड़ा परिसर में शुक्रवार को विशेष पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें न्यायालय परिसर को हरित बनाने के साथ-साथ समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया गया। यह कार्यक्रम म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के तहत आयोजित किया गया।
कार्यक्रम अध्यक्ष, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जीतेन्द्र कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस दौरान माननीय न्यायाधीश श्रीमती पूर्वी तिवारी ने स्वयं पौधे रोपकर कार्यक्रम का नेतृत्व किया और सभी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उनकी सक्रिय भागीदारी और समर्पण ने कार्यक्रम को विशेष प्रेरणादायक बना दिया। उनकी यह पहल न केवल न्यायालय परिसर तक सीमित रही, बल्कि समाज के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।
इस अवसर पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री राजेश प्यासी, अधिवक्ता श्री रमेश पटेल एवं न्यायालयीन स्टाफ की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। सभी ने मिलकर पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
माननीय न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता का क्षरण मानव अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। ऐसे समय में हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्रकृति के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा, “जल है तो कल है और वन है तो जीवन है। पेड़ हमारे जीवन के आधार हैं, जो हमें शुद्ध वायु प्रदान करते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि पेड़ निःस्वार्थ भाव से हमें जीवन देते हैं, ठीक उसी तरह जैसे भगवान शंकर ने विषपान कर संसार की रक्षा की थी। यह संदेश हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संरक्षण की भावना सिखाता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने का संकल्प लिया। यह पहल निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में सहायक बनेगी।



