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भरभरा आश्रम में श्रीराम भक्ति का विराट उत्सव, शिव मंदिर परिसर बना आस्था का केंद्र लोकगायन, कथक नृत्य नाटिका और भक्ति संध्या ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर 

कलयुग की कलम से राकेश यादव

भरभरा आश्रम में श्रीराम भक्ति का विराट उत्सव, शिव मंदिर परिसर बना आस्था का केंद्र लोकगायन, कथक नृत्य नाटिका और भक्ति संध्या ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर 

कलयुग की कलम उमरिया पान – श्रीरामनवमी के पावन अवसर पर उमरियापान क्षेत्र स्थित भरभरा आश्रम के शिव मंदिर परिसर में शुक्रवार शाम एक भव्य ‘आविर्भाव समारोह’ का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में भक्ति, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिला। शाम 6:30 बजे से शुरू हुए आयोजन ने देर रात तक श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रस में डुबोए रखा।

कार्यक्रम में जिला भाजपा अध्यक्ष दीपक टंडन सोनी, सांसद प्रतिनिधि पद्मेश गौतम, राजेश राजा चौरसिया, गोविंद प्रताप सिंह,पर्यावरणविद् निर्भय सिंह, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुनीता दुबे, जनपद उपाध्यक्ष दुर्गा पटेल, एसडीएम निधि गोहल, सीईओ यजुवेंद्र कोरी सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

समारोह की शुरुआत जबलपुर के प्रसिद्ध लोकगायक भवानीदास अहिरवार की बुंदेली लोकगायन प्रस्तुति से हुई। उनके द्वारा प्रस्तुत “जनम लये राजा राम…”, “राम लखन सिया जानकी…” और “मन भज लैयो राम नाम…” जैसे भक्ति गीतों ने पूरे वातावरण को राममय बना दिया। शिव स्तुति और माँ नर्मदा पर आधारित गीतों ने भी श्रोताओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।

इसके बाद कथक नृत्यांगना डॉ. श्यामा पंडित के निर्देशन में “मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम” पर आधारित कथक नृत्य नाटिका का मंचन हुआ। इस प्रस्तुति में राम-सीता वनवास, सीता हरण, राम की शक्ति पूजा और रावण वध जैसे प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। लय, ताल और भावों के उत्कृष्ट संयोजन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से “राम की शक्ति पूजा” और “रावण वध” के दृश्य ने दर्शकों में भक्ति और वीर रस का संचार किया।

अंतिम चरण में बुरहानपुर के नितेश सिंह एवं उनके साथियों ने भक्तिगायन की मनोहारी प्रस्तुति दी। “नगरी हो अयोध्या सी…”, “दुनिया चले ना श्रीराम के बिना…” और “श्रीराम जानकी बैठे हैं…” जैसे गीतों ने पूरे आश्रम परिसर को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। मधुर संगीत, सधे हुए सुर और भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, समर्पण और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने भरभरा आश्रम के शिव मंदिर परिसर को एक दिव्य और अविस्मरणीय आध्यात्मिक उत्सव में बदल दिया।

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