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बाल विवाह पर करारा प्रहार, जागरूकता से सशक्त हुईं बेटियाँ सरसवाही में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत जागरूकता व प्रशिक्षण कार्यक्रम, 300 छात्राओं ने ली शपथ

कलयुग की कलम से राकेश यादव

बाल विवाह पर करारा प्रहार, जागरूकता से सशक्त हुईं बेटियाँ सरसवाही में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत जागरूकता व प्रशिक्षण कार्यक्रम, 300 छात्राओं ने ली शपथ

कलयुग की कलमकटनी – कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत शासकीय आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर, सरसवाही में जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए उन्हें शिक्षा, अधिकार और सुरक्षित भविष्य के प्रति सजग बनाना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायक संचालक सुश्री वनश्री कुर्वेती के संबोधन से हुई। उन्होंने उपस्थित छात्राओं एवं शिक्षकगण को अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि कानूनन विवाह की न्यूनतम आयु बालिका के लिए 18 वर्ष एवं बालक के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में विवाह करना दंडनीय अपराध है और यह बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा व भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

इस अवसर पर संरक्षण अधिकारी श्री मनीष तिवारी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्प आयु में विवाह से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। प्रत्येक बालिका को शिक्षा और आत्मनिर्भरता का अवसर मिलना चाहिए। बाल विवाह की किसी भी सूचना पर चाइल्ड लाइन 1098, आपातकालीन नंबर 112 अथवा महिला हेल्पलाइन 181 पर तत्काल संपर्क करने की अपील की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के प्राचार्य श्री शत्रुघ्न त्रिपाठी ने कहा कि बाल विवाह मुक्त भारत केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसे घर-घर तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक बनें और समाज में भी इस संदेश को फैलाएं।

कार्यक्रम के समापन पर लगभग 300 छात्राओं, शिक्षकगण एवं अधिकारियों ने बाल विवाह मुक्त भारत के निर्माण की सामूहिक शपथ लेकर सामाजिक कुरीति के विरुद्ध एकजुट होने का संकल्प लिया।

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