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कदमताल से गूंजा उमरिया पान, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के संदेश के साथ निकला संघ का भव्य पथ संचलन,मंगल भवन से पथ संचलन का शुभारंभ हुआ नगर भ्रमण, करते हुए गणवेशधारी स्वयंसेवकों की एकजुटता और अनुशासित कदमताल ने नगरवासियों का ध्यान आकर्षित किया पथ संचलन का समापन सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ 

कलयुग की कलम से राकेश यादव

कदमताल से गूंजा उमरिया पान, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के संदेश के साथ निकला संघ का भव्य पथ संचलन,मंगल भवन से पथ संचलन का शुभारंभ हुआ नगर भ्रमण, करते हुए गणवेशधारी स्वयंसेवकों की एकजुटता और अनुशासित कदमताल ने नगरवासियों का ध्यान आकर्षित किया पथ संचलन का समापन सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ 

कलयुग की कलम उमरिया पान – उमरिया पान नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। गणवेशधारी स्वयंसेवकों की अनुशासित कदमताल, सामूहिक एकजुटता और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण ने नगर में विशेष आकर्षण पैदा किया। पथ संचलन के माध्यम से संघ ने सामाजिक संगठन, अनुशासन, समरसता और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री अश्वनी शुक्ला उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में जिला कार्यवाह श्री संजय त्रिपाठी ने स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने संघ के विचार, संगठन की भूमिका तथा समाज जीवन में स्वयंसेवकों के दायित्वों के महत्व पर प्रकाश डाला।

पथ संचलन का शुभारंभ मंगल भवन से हुआ। यहां से स्वयंसेवकों का अनुशासित दल झंडा चौक, बस्ती अंदर, आजाद चौक एवं न्यू बस स्टैंड सहित नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचा, जहां संचलन का समापन हुआ। मार्ग में जगह-जगह नगरवासियों ने उत्सुकता के साथ पथ संचलन को देखा और नगर के चौक चौराहों पर स्वयंसेवकों के उपर पुष्पों की वर्षा की।

अनुशासन और एकात्मता का संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यपद्धति में पथ संचलन का विशेष महत्व है। यह केवल एक सामूहिक मार्च नहीं, बल्कि अनुशासन, समयबद्धता, सामूहिकता और संगठन के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। संघ की शाखाओं में शारीरिक, बौद्धिक एवं नैतिक विकास के साथ स्वयंसेवकों में समाज के प्रति कर्तव्यबोध और सेवा की भावना विकसित करने पर जोर दिया जाता है।

कार्यक्रम का मूल उद्देश्य समाज में संगठन शक्ति, भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के प्रति जागरूकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठा की भावना को सुदृढ़ करना रहा। पथ संचलन में सभी वरिष्ठ एवं युवा स्वयंसेवकों की एकरूपता और अनुशासित कदमताल ने संघ की सामूहिक कार्यशैली का परिचय दिया।

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