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डेढ़ दशक का इंतजार खत्म: देश की सबसे लंबी वाटर टनल तैयार, नर्मदा का जल अब पांच जिलों के खेतों तक पहुंचाएगा खुशहाली,स्लीमनाबाद टनल का खुदाई कार्य पूरा, 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित, कटनी शहर को भी मिलेगा नर्मदा का पेयजल

कलयुग की कलम से राकेश यादव

डेढ़ दशक का इंतजार खत्म: देश की सबसे लंबी वाटर टनल तैयार, नर्मदा का जल अब पांच जिलों के खेतों तक पहुंचाएगा खुशहाली,स्लीमनाबाद टनल का खुदाई कार्य पूरा, 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित, कटनी शहर को भी मिलेगा नर्मदा का पेयजल

कलयुग की कलम कटनी – मध्यप्रदेश में सिंचाई और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। लंबे इंतजार के बाद कटनी जिले की बहुप्रतीक्षित स्लीमनाबाद वाटर टनल की खुदाई का कार्य पूरी तरह पूरा हो गया है। टनल बोरिंग मशीन अंतिम छोर तक पहुंच चुकी है, जिससे परियोजना के निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस उपलब्धि को प्रदेश में कृषि और जल संसाधन विकास की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

करीब 11.952 किलोमीटर लंबी यह टनल देश की सबसे लंबी वाटर टनल है। इसके माध्यम से मां नर्मदा का जल प्राकृतिक ढाल के सहारे बिना किसी पंपिंग व्यवस्था के सोन बेसिन तक पहुंचेगा। इससे न केवल सिंचाई क्षमता में बड़ा विस्तार होगा, बल्कि क्षेत्र के लाखों किसानों को स्थायी जल उपलब्धता का लाभ भी मिलेगा।

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत दाईं तट मुख्य नहर के हिस्से के रूप में निर्मित इस टनल का निर्माण कार्य लगभग डेढ़ दशक से जारी था। टनल का व्यास 10.140 मीटर तथा जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है। इसके आगे नहर खुले स्वरूप में विकसित की जा रही है, जिससे जल वितरण और अधिक प्रभावी होगा।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिलों की कुल 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। इसमें अकेले कटनी जिले की 21,823 हेक्टेयर भूमि को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही कटनी शहर की पेयजल व्यवस्था भी नर्मदा के जल से सुदृढ़ होगी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका लाभ प्राप्त होगा।

बरगी बांध से निकलने वाली यह दाईं तट मुख्य नहर प्रदेश की सर्वाधिक जल वहन क्षमता वाली नहरों में शामिल होगी, जिसकी क्षमता 227 क्यूमेक निर्धारित की गई है। परियोजना पर अब तक 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आ चुकी है। निर्माण कार्य हैदराबाद की मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्ल्यूयू (संयुक्त उपक्रम) द्वारा किया जा रहा है।

स्लीमनाबाद टनल के पूर्ण होने के साथ ही नर्मदा जल को सोन नदी बेसिन से जोड़ने का वर्षों पुराना सपना साकार होने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने, भूजल स्तर में सुधार, पेयजल आपूर्ति मजबूत होने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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