एक्सक्लूसिव खबरेंमध्यप्रदेश

रेत के लालच में सूखती बेलकुंड नदी, प्यास से बेहाल  पशु  और वन्यजीव”कभी गर्मियों में भी लबालब रहने वाली नदी आज बूंद-बूंद पानी को तरसी, अवैध उत्खनन से बिगड़ा प्राकृतिक संतुलन,नदी पुनर्जीवन अभियान और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण जैसे कदम समय रहते उठाना बेहद आवश्यक है।

कलयुग की कलम से राकेश यादव

“रेत के लालच में सूखती बेलकुंड नदी, प्यास से बेहाल  पशु  और वन्यजीव”कभी गर्मियों में भी लबालब रहने वाली नदी आज बूंद-बूंद पानी को तरसी, अवैध उत्खनन से बिगड़ा प्राकृतिक संतुलन,नदी पुनर्जीवन अभियान और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण जैसे कदम समय रहते उठाना बेहद आवश्यक है।

कलयुग की कलम उमरिया पान – उमरिया पान से ढीमरखेड़ा मार्ग पर स्थित शुक्ल पिपरिया गर्रा घाट की बेलकुंड नदी आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। कभी वर्षभर बहने वाली यह नदी अब भीषण गर्मी शुरू होते ही सूखने लगी है। हालात यह हैं कि नदी के अधिकांश हिस्सों में केवल गहरे गड्ढों में ही पानी बचा है, जबकि कई स्थान पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे ग्रामीणों, पशुओं और वन्यजीवों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार एक समय ऐसा था जब भीषण गर्मी में भी बेलकुंड नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध रहता था। आसपास के गांवों के लोग घरेलू उपयोग, पशुपालन और खेती-किसानी के लिए इसी नदी पर निर्भर रहते थे। जंगलों से आने वाले वन्यजीवों और मवेशियों की प्यास भी इसी नदी से बुझती थी, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी के जलस्तर में गिरावट का सबसे बड़ा कारण वर्षों से हो रहा अवैध रेत उत्खनन है। आरोप है कि रेत निकालने के लिए कई स्थानों पर नदी की मुख्य धारा तक मोड़ दी गई, जिससे प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हुआ। लगातार रेत के अवैध उत्खनन के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ता चला गया। पर्यावरण विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नदियों में अनियंत्रित रेत खनन से जलस्रोत कमजोर होते हैं और भूजल स्तर पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

बेलकुंड नदी के सूखने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजमर्रा के जीवन पर असर दिखाई देने लगा है। कई गांवों में पशुओं को पानी पिलाने के लिए लोगों को दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है। वहीं वन्यजीव भी पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ रहा है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि नदियां केवल जलस्रोत नहीं बल्कि प्राकृतिक धरोहर हैं, जिनका संरक्षण वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए जरूरी है। जल संरक्षण, अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, नदी पुनर्जीवन अभियान और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण जैसे कदम समय रहते उठाना बेहद आवश्यक है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि बेलकुंड नदी की मुख्य धारा को पुनर्जीवित करने, अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने और जल संरक्षण के स्थायी उपाय लागू करने के लिए तत्काल ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस प्राकृतिक धरोहर को बचाया जा सके।

Related Articles

Back to top button