आस्थामध्यप्रदेश

600 वर्षों पुरानी आस्था का केंद्र: बड़ी मढिया–छोटी मढिया में नवरात्र पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दूर-दराज से पहुंच रहे भक्त 

कलयुग की कलम से राकेश यादव

600 वर्षों पुरानी आस्था का केंद्र: बड़ी मढिया–छोटी मढिया में नवरात्र पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दूर-दराज से पहुंच रहे भक्त 

कलयुग की कलम सिलौंडी – नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर सिलौंडी गांव स्थित प्राचीन बड़ी मढिया और छोटी मढिया के माता मंदिरों में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। करीब 600 वर्षों पुराना यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर माथा टेक रहे हैं और सुख-समृद्धि की कामना कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

नवरात्रि के इन विशेष दिनों में मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। ढोल-नगाड़ों और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज रहा है, जिससे श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, सिलौंडी में बड़ी मढिया, छोटी मढिया, रामबाग स्थित खेरमाता, कटीखेड़ा खेरमाता सहित भारत नगर में भी माता के मंदिर स्थित हैं, जहां वर्षों पुरानी परंपराओं का आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निर्वहन किया जाता है। नवरात्रि के दौरान मंदिरों में जवारें बोने की परंपरा विशेष रूप से निभाई जाती है और श्रद्धालु माता को अठवाई प्रसाद अर्पित कर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

मान्यता है कि माता रानी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि यहां आने वाले भक्तों का विश्वास लगातार मजबूत होता जा रहा है।

बड़ी मढिया मंदिर में शर्मा परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से माता रानी की सेवा में समर्पित है, वहीं छोटी मढिया में श्रीवास्तव परिवार भी पांच पीढ़ियों से पूजा-अर्चना की परंपरा निभा रहा है। विशेष बात यह है कि सिलौंडी से जुड़े परिवारों के सदस्य, चाहे वे भोपाल, इंदौर, जबलपुर या अन्य शहरों में निवासरत हों, नवरात्रि की अष्टमी पर यहां पहुंचकर माता रानी के दर्शन अवश्य करते हैं।

नवरात्रि के इस पावन अवसर पर सिलौंडी के इन मंदिरों में उमड़ रही आस्था और भक्ति की यह तस्वीर क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है।

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