भक्ति, आस्था और परंपरा का संगम: उमरियापान में भव्यता के साथ निकली निषादराज जयंती की शोभायात्रा समाजसेवियों व जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीणों की बड़ी संख्या में शोभायात्रा में रही उपस्थिति
कलयुग की कलम से राकेश यादव

भक्ति, आस्था और परंपरा का संगम: उमरियापान में भव्यता के साथ निकली निषादराज जयंती की शोभायात्रा समाजसेवियों व जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीणों की बड़ी संख्या में शोभायात्रा में रही उपस्थिति
कलयुग की कलम उमरिया पान – नगर में निषाद समाज द्वारा भगवान निषादराज जयंती का पर्व इस वर्ष अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित शोभायात्रा और चल समारोह ने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण में रंग दिया। पुरवा मोहल्ला से प्रारंभ हुई यह भव्य यात्रा आजाद चौक, न्यू बस स्टैंड, मुख्य बाजार और झंडा चौक से होकर नगर भ्रमण करते हुए संपन्न हुई।

शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता जानकी और निषादराज की जीवंत झांकियां रहीं, जिन्हें देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर झांकियों का स्वागत किया और विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर विश्व कल्याण की कामना की।
निषादराज जयंती भारतीय संस्कृति में सामाजिक समरसता, मित्रता और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है। रामायण काल में निषादराज गुह और भगवान श्रीराम की मित्रता त्याग, निष्ठा और समानता का संदेश देती है। यही कारण है कि यह पर्व समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम बन गया है।
इस अवसर पर बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने शोभायात्रा में पहुंचकर जीवंत झांकियों की पूजा-अर्चना की और क्षेत्रवासियों की खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम के पश्चात विधायक श्री सिंह उमरियापान नगर में स्थित बाला जी एवं महाकाली माता मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने महाआरती में शामिल होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
पूरे आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही। आयोजन समिति द्वारा यात्रा के दौरान अनुशासन और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। ट्रैफिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थाना प्रभारी महेंद्र जायसवाल शोभायात्रा के दौरान अपने स्टाफ के साथ मौजूद रहे।
जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए थे, जहां श्रद्धालुओं ने जलपान और प्रसाद की व्यवस्था की। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की धुन पर झूमते श्रद्धालुओं ने पूरे नगर को उत्सवमय बना दिया।निषादराज जयंती का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का भी सशक्त संदेश दे गया।



