उमरियापान की ऐतिहासिक बावड़ी को मिला नया जीवन: श्रमदान से चमकी धरोहर, स्वच्छता का दिया संदेश,जन अभियान परिषद के नेतृत्व में चला सफाई अभियान, समाजसेवियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर निभाई जिम्मेदारी
कलयुग की कलम से राकेश यादव

उमरियापान की ऐतिहासिक बावड़ी को मिला नया जीवन: श्रमदान से चमकी धरोहर, स्वच्छता का दिया संदेश,जन अभियान परिषद के नेतृत्व में चला सफाई अभियान, समाजसेवियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर निभाई जिम्मेदारी
कलयुग की कलम उमरिया पान – पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और स्वच्छता के प्रति जनजागरण के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, ढीमरखेड़ा द्वारा उमरियापान के टोला रोड स्थित प्राचीन बावड़ी मंदिर परिसर में विशेष श्रमदान एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। अभियान में स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए बावड़ी एवं उसके आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई की।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनों ने श्रमदान कर बावड़ी में जमा गंदगी और कचरे को हटाया तथा परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने का संकल्प लिया। अभियान के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया गया।
स्वच्छता और संरक्षण का लिया संकल्प
धरवारा सेक्टर प्रभारी कोदुलाल हल्दकार ने उपस्थित लोगों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि जल संरचनाएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिनके संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है।
समाजसेवियों और युवाओं की रही सक्रिय भागीदारी
अभियान में मंडल अध्यक्ष आशीष चौरसिया, समाजसेवी राजेश ब्यौहार, उपाध्यक्ष प्रमोद असाटी, प्रदीप चौरसिया, अनिल मिश्रा, यज्ञ नारायण कुररिया, ढीमरखेड़ा सेक्टर प्रभारी प्रकाशनाथ साहू, उमरियापान सेक्टर प्रभारी श्रीकांत पटेल, परामर्शदाता अंकित झारिया, सुमित सिंह ठाकुर सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा सीएमसीएलडीपी के छात्र-छात्राओं सुनील गुप्ता, ज्योति पटेल, सुजीत बर्मन, शालिनी कोरी, नैतिक बर्मन, हिमांशु बर्मन सहित अनेक युवाओं ने श्रमदान कर अभियान को सफल बनाया।
जल संरक्षण और जनभागीदारी का प्रेरक उदाहरण
स्वच्छता अभियान के दौरान उपस्थित लोगों ने संदेश दिया कि ऐतिहासिक जल स्रोतों और सार्वजनिक स्थलों की देखरेख केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है। कार्यक्रम ने जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और जल संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।



