इधर मध्यप्रदेश पटवारी संघ की तरफ से भी एक ज्ञापन कलेक्टर के नाम दिया गया। इसमें कहा गया कि पटवारी जागेंद्र पिपरी के खिलाफ विभागीय जांच के बगैर दर्ज कराई गई एफआइआर नियमों के विपरीत है। जिला इकाई की ओर से दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वर्तमान में जिले में उच्च अधिकारियों की ओर से न्यायालयीन कार्यों को शिविर मोड में परिवर्तित किया जा रहा है। जांच प्रतिवेदन व अन्य कार्य में जल्दबाजी कराई जा रही है। यह न्यायालयीन प्रक्रिया का दमन है।