जिसका डर था, आखिर वही हुआ: मृत गाय तालाब में पहुंची, चील-कौवे नोच रहे मांस,तहसील कार्यालय मार्ग किनारे फेंका गया था मृत पशु, पंचायत को सूचना के बाद भी समय पर नहीं हुई कार्रवाई; बदबू से राहगीर और मंडी परिसर के लोग परेशान
कलयुग की कलम से राकेश यादव

जिसका डर था, आखिर वही हुआ: मृत गाय तालाब में पहुंची, चील-कौवे नोच रहे मांस,तहसील कार्यालय मार्ग किनारे फेंका गया था मृत पशु, पंचायत को सूचना के बाद भी समय पर नहीं हुई कार्रवाई; बदबू से राहगीर और मंडी परिसर के लोग परेशान
कलयुग की कलम उमरिया पान – स्वच्छता को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने और लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर लापरवाही की तस्वीरें सामने आती रहती हैं। उमरिया पान तहसील कार्यालय मार्ग पर तलैया के समीप सड़क किनारे एक मृत गाय को ग्रामीणों द्वारा खुले में फेंके जाने के बाद अब स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। मृत गाय के तालाब के पानी में चले जाने और फूलकर फट जाने के बाद आसपास दुर्गंध फैल रही है। वहीं चील-कौवे मृत पशु के मांस को नोचते नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, उमरिया पान तहसील की ओर जाने वाली सड़क किनारे मृत गाय पड़े होने की सूचना पंचायत को दी गई थी। बताया गया कि पंचायत की ओर से शाम तक मृत पशु को वहां से हटाकर उचित स्थान पर गड्ढा खोदकर दफनाने की बात कही गई थी, लेकिन देर शाम तक पंचायत की टीम मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद सुबह तक मृत गाय तालाब के पानी में चली गई और पानी में फूलकर फट गई। वर्तमान में आसपास तेज दुर्गंध के कारण तहसील कार्यालय आने-जाने वाले लोगों, राहगीरों तथा मंडी परिसर से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्वच्छता सिर्फ सरकारी अभियान नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी
यह घटना केवल सफाई व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी को लेकर भी गंभीर संदेश देती है। गांव, कस्बे, बस्ती और वार्ड को स्वच्छ रखना केवल शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है। यदि किसी के पालतू पशु की मृत्यु हो जाती है तो मृत पशु को सड़क, तालाब अथवा सार्वजनिक स्थान पर फेंकने के बजाय निर्धारित अथवा एकांत स्थान पर विधिवत गड्ढा खोदकर उसका निस्तारण किया जाना चाहिए।
गौ माता कहने भर से नहीं, मृत्यु के बाद सम्मान भी जरूरी
गाय को भारतीय समाज में गौ माता के रूप में सम्मान दिया जाता है। जब तक गाय दूध देती है, तब तक उसकी देखभाल की जाती है, लेकिन मृत्यु के बाद उसे लावारिस हालत में सार्वजनिक स्थान पर फेंक देना हमारी संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है। पशु के प्रति सम्मान केवल उसके जीवित रहने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मृत्यु के बाद भी उसके शव का सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से निस्तारण किया जाना आवश्यक है।
जिम्मेदारों से तत्काल कार्रवाई की मांग
तहसील कार्यालय मार्ग जैसे सार्वजनिक और महत्वपूर्ण स्थान के समीप इस तरह मृत पशु का पड़े रहना स्वच्छता व्यवस्था के साथ-साथ संक्रमण और पर्यावरणीय दृष्टि से भी गंभीर विषय है। नागरिकों ने जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल मृत पशु को हटवाने, आसपास की सफाई कराने तथा भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो इसके लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही पशुपालकों से भी अपील की गई है कि वे मृत पशुओं को खुले में न छोड़ें और उनका विधिवत निस्तारण कराएं।
नगर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन के साथ हम सभी की है। जरूरत इस बात की है कि स्वच्छता अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम बनकर न रह जाए, बल्कि प्रत्येक नागरिक इसे अपनी जिम्मेदारी समझकर अपनाए।



