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15 साल का इंतजार खत्म होने की ओर: स्लीमनाबाद टनल से बहेगा नर्मदा का अमृत जल, 6 जिलों के 1.85 लाख हेक्टेयर खेत होंगे सिंचित

कलयुग की कलम से राकेश यादव

15 साल का इंतजार खत्म होने की ओर: स्लीमनाबाद टनल से बहेगा नर्मदा का अमृत जल, 6 जिलों के 1.85 लाख हेक्टेयर खेत होंगे सिंचित

कलयुग की कलम कटनी – मध्यप्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आने वाली है। कटनी जिले की बहुप्रतीक्षित स्लीमनाबाद टनल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी इस विशाल टनल की खुदाई में अब केवल 40 मीटर का कार्य शेष है। यदि तकनीकी कार्य सुचारु रूप से चलता रहा, तो 15 जुलाई तक टनल का खनन कार्य पूरा होने की संभावना है।

करीब डेढ़ दशक से निर्माणाधीन यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूर्ण होने के बाद नर्मदा का जल प्रदेश के छह जिलों तक पहुंचेगा, जिससे लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। साथ ही कटनी शहर सहित आसपास के क्षेत्रों को पेयजल उपलब्ध कराने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

किसानों की बदलेगी तस्वीर, कृषि को मिलेगा नया जीवन

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत निर्मित स्लीमनाबाद टनल क्षेत्र के किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आ रही है। परियोजना के पूरा होने के बाद सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि, कृषि आय में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास और पेयजल व्यवस्था को भी मजबूत बनाएगी।

इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

परियोजना से कटनी, मैहर, सतना, पन्ना, रीवा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को व्यापक लाभ मिलेगा। इनमें कटनी के 21,823 हेक्टेयर, मैहर के 54,227 हेक्टेयर, सतना के 1,04,970 हेक्टेयर, पन्ना के 448 हेक्टेयर तथा रीवा के 3,084 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।

प्रदेश की सबसे बड़ी क्षमता वाली नहरों में शामिल

बरगी बाँध से निकलने वाली दाई तट मुख्य नहर (ट्रांस वैली कैनाल) प्रदेश की सबसे अधिक जल वहन क्षमता वाली नहरों में शामिल होगी। इसकी जल प्रवाह क्षमता 227 क्यूमेक तक होगी, जबकि स्लीमनाबाद टनल का व्यास 10.14 मीटर है। परियोजना की लागत बढ़कर 1,600 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है और इसका निर्माण हैदराबाद की पटेल-एस.ई.डब्ल्यूयू (संयुक्त उपक्रम) द्वारा किया जा रहा है।

नर्मदा का जल पहुंचेगा सोन नदी तक

परियोजना पूर्ण होने के बाद पुण्य सलिला मां नर्मदा का जल सोन नदी से जुड़ेगा। इससे प्रदेश के आधा दर्जन जिलों में सिंचाई और पेयजल की व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। लंबे समय से प्रतीक्षित यह परियोजना मध्यप्रदेश के जल प्रबंधन और कृषि विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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