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7 अप्रैल से कटनी में गेहूँ खरीदी शुरू, किसानों के लिए बड़ी राहत — 77 उपार्जन केंद्र तय  समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल, ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग से होगी आसान खरीदी प्रक्रिया

कलयुग की कलम से राकेश यादव

7 अप्रैल से कटनी में गेहूँ खरीदी शुरू, किसानों के लिए बड़ी राहत — 77 उपार्जन केंद्र तय  समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल, ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग से होगी आसान खरीदी प्रक्रिया

कलयुग की कलम कटनी – जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन का कार्य 7 अप्रैल से शुरू होकर 12 मई तक किया जाएगा। जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। कलेक्टर आशीष तिवारी ने जिला उपार्जन समिति की अनुशंसा पर जिले भर में 77 उपार्जन केंद्र निर्धारित करते हुए इनके सुचारू संचालन के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है।

इस वर्ष शासन द्वारा गेहूँ का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। किसानों से गेहूँ खरीदी सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक की जाएगी। वहीं शनिवार और रविवार को परिवहन, भंडारण एवं लेखा मिलान जैसे कार्य संपादित किए जाएंगे।

 ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग से मिलेगी सुविधा

किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पहले से स्लॉट बुक करना होगा। इसके लिए वे शासन की आधिकारिक वेबसाइट www.mpeuparjan.nic.in⁠� पर जाकर आसानी से पंजीयन एवं स्लॉट बुकिंग कर सकते हैं। इससे केंद्रों पर भीड़ कम होगी और खरीदी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकेगी।

 जिलेभर में बनाए गए उपार्जन केंद्र

जिले की विभिन्न तहसीलों—कटनी, ढीमरखेड़ा, बड़वारा, बरही, बहोरीबंद, रीठी, विजयराघवगढ़ एवं स्लीमनाबाद—में उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक केंद्र पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है, जो खरीदी कार्य की निगरानी एवं व्यवस्था बनाए रखेंगे।

ढीमरखेड़ा क्षेत्र में कुदवारी, खाम्हा, खमतरा, कटरिया, पोंडीकला, सिलौड़ी (नेगई), कचनारी, झिन्ना, उमरियापान (मंडी) सहित कई केंद्र बनाए गए हैं, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज बेचने में सहूलियत मिलेगी।

प्रशासन की सख्त निगरानी

जिला प्रशासन द्वारा पूरे उपार्जन कार्य पर सतत निगरानी रखी जाएगी, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।

इस व्यवस्था से जिले के हजारों किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने के साथ ही बिक्री प्रक्रिया भी आसान और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

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