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माइनिंग कैपिटल’ बनने की ओर कटनी: बड़वारा में 50 हेक्टेयर डोलोमाइट आरक्षित, निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

कलयुग की कलम से राकेश यादव

 ‘माइनिंग कैपिटल’ बनने की ओर कटनी: बड़वारा में 50 हेक्टेयर डोलोमाइट आरक्षित, निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

कलयुग की कलम कटनी – खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध कटनी जिला अब प्रदेश की ‘माइनिंग कैपिटल’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले में 20 से अधिक प्रकार के खनिजों की उपलब्धता, लगातार बढ़ते राजस्व और प्रशासनिक सक्रियता ने इसे औद्योगिक मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में राज्य शासन ने बड़वारा तहसील के बड़ेरा और बचरबाड़ा क्षेत्र में 50 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर तीन बड़े डोलोमाइट ब्लॉक्स माइनिंग कॉर्पोरेशन के लिए आरक्षित किए हैं, जिससे खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना और बड़े निवेश की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।

कटनी की धरती पहले से ही चूना पत्थर, डोलोमाइट, बॉक्साइट, मार्बल और आयरन ओर जैसे खनिजों से समृद्ध रही है, वहीं हालिया सर्वे में सोना और कोयले के नए भंडार मिलने से जिले की आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा मिली है। प्रशासन के प्रभावी प्रबंधन के चलते खनिज राजस्व में भी ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है, जहां पहले औसत आय करीब 100 करोड़ रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 160 करोड़ रुपये वार्षिक से अधिक पहुंच गई है।

अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। बड़वारा रोड पर स्थापित ई-चेक गेट से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की ऑनलाइन जांच की जा रही है, जबकि माइनिंग सर्विलांस सिस्टम के माध्यम से निरंतर निगरानी रखी जा रही है। साथ ही लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण कर वैधानिक खनन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

जिला प्रशासन का मानना है कि खनिज संपदा के सुनियोजित उपयोग और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए कटनी को न केवल प्रदेश, बल्कि देश के औद्योगिक परिदृश्य में एक नई पहचान दिलाई जा सकती है। आने वाले समय में यह क्षेत्र बड़े निवेश, उद्योगों की स्थापना और व्यापक रोजगार सृजन का केंद्र बनकर उभरने की पूरी क्षमता रखता है।

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