सड़क किनारे लगी कलेक्टर की ‘पाठशाला’: बच्चों से पहाड़ा और एबीसीडी सुनकर बढ़ाया हौसला,खदान निरीक्षण से लौटते समय कलेक्टर आशीष तिवारी ने छात्रों से किया संवाद, नन्हे शिवराज का स्कूल में नामांकन कराने किया प्रेरित
कलयुग की कलम से राकेश यादव

सड़क किनारे लगी कलेक्टर की ‘पाठशाला’: बच्चों से पहाड़ा और एबीसीडी सुनकर बढ़ाया हौसला,खदान निरीक्षण से लौटते समय कलेक्टर आशीष तिवारी ने छात्रों से किया संवाद, नन्हे शिवराज का स्कूल में नामांकन कराने किया प्रेरित
कलयुग की कलम कटनी – प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच बच्चों की शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता का प्रेरक उदाहरण बुधवार को उस समय देखने को मिला, जब कलेक्टर आशीष तिवारी स्लीमनाबाद क्षेत्र के ग्राम निमास स्थित मार्बल खदान का निरीक्षण कर लौट रहे थे। रास्ते में छोटे कछारगांव के पास स्कूल से घर लौट रहे छात्र-छात्राओं को देखकर उन्होंने अपना वाहन रुकवाया और बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी पढ़ाई, स्कूल और भविष्य को लेकर आत्मीय संवाद किया। कुछ ही मिनटों की यह मुलाकात बच्चों के लिए यादगार बन गई, जबकि आसपास मौजूद ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना की।
पहाड़ा और एबीसीडी सुनकर दिया उत्साहवर्धन
संवाद के दौरान बच्चों ने बताया कि वे निमास माध्यमिक शाला और कछार गांव की प्राथमिक शाला में अध्ययनरत हैं। कलेक्टर ने कक्षा सातवीं की छात्रा महिमा ठाकुर से दो और चार का पहाड़ा सुना, जिसे उसने आत्मविश्वास के साथ सुनाया। उसकी लगन से प्रभावित होकर कलेक्टर ने उसे कॉपी और पेन भेंट किए। वहीं कक्षा दूसरी के छात्र प्रिंस ठाकुर ने पूरी एबीसीडी सुनाई, जिस पर खुश होकर कलेक्टर ने उसे भी पेन देकर प्रोत्साहित किया।
गणित के सवालों का बेझिझक दिया जवाब
कलेक्टर ने छात्रा महिमा ठाकुर से गणित के कुछ प्रश्न भी पूछे। महिमा ने सभी सवालों के सही और आत्मविश्वासपूर्ण उत्तर दिए। इससे प्रभावित होकर कलेक्टर ने उसकी सराहना की और अन्य विद्यार्थियों को भी नियमित अध्ययन कर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
नन्हे शिवराज को स्कूल भेजने की दिलाई प्रेरणा
मुलाकात के दौरान कक्षा सातवीं की छात्रा रागिनी ठाकुर अपने छोटे भाई शिवराज के साथ मौजूद थी। बातचीत में पता चला कि शिवराज का अभी स्कूल में नामांकन नहीं हुआ है। इस पर कलेक्टर ने रागिनी और उसके परिजनों को शिवराज का शीघ्र स्कूल में प्रवेश कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि स्कूल में नामांकन होने पर उसे निःशुल्क ड्रेस, पाठ्यपुस्तकें, मध्यान्ह भोजन सहित शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिससे उसका भविष्य मजबूत होगा।
शिवराज की मासूमियत ने जीत लिया दिल
बातचीत के दौरान कलेक्टर ने नन्हे शिवराज से कुछ सहज सवाल पूछे, जिनका उसने अपनी मासूम और चुलबुली शैली में जवाब दिया। उसके जवाब सुनकर वहां मौजूद अधिकारी और ग्रामीण मुस्कुरा उठे। इस आत्मीय संवाद ने पूरे माहौल को सहज और प्रेरणादायक बना दिया।
इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएएस श्लोक वाईकर, एसडीएम बहोरीबंद प्रदीप मिश्रा, उपसंचालक खनिज रत्नेश दीक्षित तथा महाप्रबंधक उद्योग ज्योति सिंह भी उपस्थित रहे।
सड़क किनारे हुई यह छोटी-सी ‘पाठशाला’ एक बड़ा संदेश देकर गई कि बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए केवल संसाधन ही नहीं, बल्कि समय, संवाद और प्रोत्साहन भी उतना ही आवश्यक है।



