गुरुजनों के सम्मान में सजा PSM, गूंजे गुरु-महिमा के स्वर,शिक्षक दिवस पर प्रगत शैक्षिक अध्ययन संस्थान में हुआ गरिमामयी आयोजन, छात्राध्यापकों ने तिलक, पुष्प और कलम भेंट कर जताया आभार
कलयुग की कलम से राकेश यादव

गुरुजनों के सम्मान में सजा PSM, गूंजे गुरु-महिमा के स्वर,शिक्षक दिवस पर प्रगत शैक्षिक अध्ययन संस्थान में हुआ गरिमामयी आयोजन, छात्राध्यापकों ने तिलक, पुष्प और कलम भेंट कर जताया आभार
कलयुग की कलम जबलपुर – गुरु केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा, संस्कार और उद्देश्य प्रदान करने वाले मार्गदर्शक होते हैं। इसी भावना के साथ प्रगत शैक्षिक अध्ययन संस्थान (PSM), जबलपुर में शिक्षक दिवस का गरिमामयी आयोजन उत्साह और आत्मीयता के साथ किया गया। कार्यक्रम संस्थान की प्राचार्य एफ. इक्का के संरक्षण एवं प्राध्यापकों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य एफ. इक्का ने मां वीणावादिनी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद छात्राध्यापकों ने संस्थान के सभी प्राध्यापकों का तिलक-वंदन कर पुष्प एवं शिक्षक के सामर्थ्य का प्रतीक कलम भेंट करते हुए सम्मान किया। इस दौरान गुरुजनों के प्रति विद्यार्थियों की श्रद्धा, कृतज्ञता और आत्मीय भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
आयोजन में संजीव अग्रवाल, राजकुमारी दुबे, ज्योति खरे, अर्चना दुबे, पटेल, विनोद कुमार घोषी, विनीत चौहान, शेख मुनीर, सारिका चौकसे एवं मेघना सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। छात्राध्यापकों को मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्रदान करने में रीना जैन का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम का संचालन रामरतन जंगेबाज, अमिता कौर एवं नीतू वैभव जोजफ ने संयुक्त रूप से किया। सांस्कृतिक एवं काव्यात्मक प्रस्तुतियों के दौरान प्रगति पटेल, प्रीति दुबे, विनीता, रामरतन एवं अमिता कौर ने दोहों का भावपूर्ण पाठ किया। संत कबीरदास के गुरु-महिमा से जुड़े प्रसिद्ध दोहे ने आयोजन के वातावरण को विशेष रूप से भावुक एवं श्रद्धामय बना दिया।
इसके बाद प्राचार्य एफ. इक्का ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में छात्राध्यापकों को भावी शिक्षक के रूप में पूरी निष्ठा, जिम्मेदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संदेश दिया। उन्होंने शिक्षक की भूमिका को समाज निर्माण से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को अपने भावी दायित्वों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।
आयोजन को सफल बनाने में पीआरओ आदर्श द्विवेदी, शमसुन कुरैशी, राजेन्द्र सहित समस्त छात्राध्यापक समूह का उल्लेखनीय योगदान रहा। शिक्षक दिवस का यह आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा, सम्मान, विश्वास और संस्कारों की भावना को मजबूत करने वाला रहा।



