ढीमरखेड़ा में एनआरएलएम पर बड़ी कार्रवाई: सहायक विकासखंड प्रबंधक सुधीर बिन्द की संविदा सेवा समाप्त,लगातार लापरवाही, अनधिकृत अवकाश और कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होने पर जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर ने लिया कड़ा निर्णय
कलयुग की कलम से राकेश यादव

ढीमरखेड़ा में एनआरएलएम पर बड़ी कार्रवाई: सहायक विकासखंड प्रबंधक सुधीर बिन्द की संविदा सेवा समाप्त,लगातार लापरवाही, अनधिकृत अवकाश और कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होने पर जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर ने लिया कड़ा निर्णय
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा में मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में पदस्थ सहायक विकासखंड प्रबंधक सुधीर कुमार बिन्द के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। अतिरिक्त मिशन संचालक एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने उनकी संविदा सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया है।
यह कार्रवाई पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्धारित प्रावधानों के तहत, कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन के बाद की गई है। विभागीय स्तर पर लंबे समय से सामने आ रही कार्य संबंधी शिकायतों और दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित सुधार नहीं होने को कार्रवाई का प्रमुख आधार बताया गया है।
लापरवाही और कमजोर कार्यप्रणाली बनी कार्रवाई की वजह
जारी आदेश के अनुसार, सुधीर बिन्द पर अपने पद से जुड़े दायित्वों के प्रति लगातार लापरवाही और उदासीनता बरतने के आरोप सामने आए। उनके कार्यक्षेत्र में गठित सामुदायिक संगठनों से संबंधित वित्तीय विसंगतियों और लेखांकन संबंधी त्रुटियों को लेकर भी शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
विभागीय कार्यकाल के दौरान बिना पूर्व सूचना एवं सक्षम अनुमति के अनधिकृत रूप से अवकाश लेने की बात भी सामने आई। इसके अलावा, आवश्यकता के समय दूरभाष पर संपर्क किए जाने के बावजूद फोन रिसीव नहीं करने का उल्लेख भी विभागीय आदेश में किया गया है।
चेतावनी और मानदेय कटौती के बाद भी नहीं सुधरी कार्यशैली
प्रशासन के अनुसार, कार्य में सुधार के लिए संबंधित कर्मचारी को कई अवसरों पर चेतावनी पत्र जारी किए गए। इसके साथ ही दंडात्मक कार्रवाई के रूप में मानदेय में कटौती भी की गई, लेकिन इसके बावजूद कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दिया।
पिछले तीन वर्षों के वार्षिक प्रतिवेदनों के औसत तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्षिक प्रतिवेदन में प्रदर्शन औसत से कम दर्ज किए जाने के बाद उन्हें अपनी कार्यशैली सुधारने का अवसर भी दिया गया था।
तीन माह का अवसर भी नहीं आया काम
विभागीय स्तर पर संबंधित कर्मचारी को प्रदर्शन में सुधार के लिए तीन माह का समय दिया गया था। इस अवधि में निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले हासिल की गई प्रगति की जानकारी भी मांगी गई। इसके बाद जारी कारण बताओ सूचना पत्र के जवाब में प्रस्तुत प्रतिवेदन का विभागीय परीक्षण एवं परिशीलन किया गया, जिसे संतोषजनक नहीं पाया गया।
लगातार सामने आई कार्य संबंधी कमियों, पूर्व में की गई चेतावनियों के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने और प्रस्तुत जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं होने के बाद संविदा सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई।



