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डेढ़ किलोमीटर की सड़क बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी मुसीबत: कीचड़ में कैद जिंदगी, अब फूटा लोगों का गुस्सा,पीडब्ल्यूडी की अनदेखी से बदहाल पोड़ी–खिरवा मार्ग: कीचड़ के दलदल में हर दिन जोखिम भरा सफर, ग्रामीण बोले— अब सड़क नहीं तो वोट नहीं

कलयुग की कलम से राकेश यादव

डेढ़ किलोमीटर की सड़क बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी मुसीबत: कीचड़ में कैद जिंदगी, अब फूटा लोगों का गुस्सा,पीडब्ल्यूडी की अनदेखी से बदहाल पोड़ी–खिरवा मार्ग: कीचड़ के दलदल में हर दिन जोखिम भरा सफर, ग्रामीण बोले— अब सड़क नहीं तो वोट नहीं

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क सुविधा के सरकारी दावों के बीच ढीमरखेड़ा विकासखंड का पोड़ी–खिरवा संपर्क मार्ग बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां कर रहा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन आने वाला लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबा यह मार्ग वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। बरसात शुरू होते ही सड़क कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन बेहद कठिन और जोखिमभरा हो गया है।

कई गांवों की जीवनरेखा, फिर भी नहीं मिला पक्का रास्ता

यह संपर्क मार्ग केवल पोड़ी और खिरवा गांवों को ही नहीं जोड़ता, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए मुख्य आवागमन का माध्यम है। इसी रास्ते से विद्यार्थी स्कूल जाते हैं, किसान अपनी उपज मंडी तक पहुंचाते हैं, मजदूर रोजगार के लिए आवागमन करते हैं और मरीज अस्पताल तक पहुंचते हैं। इसके बावजूद सड़क निर्माण और मरम्मत की दिशा में अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं हो सकी है।

बरसात में दलदल, हर कदम पर हादसे का खतरा

मानसून की बारिश के बाद सड़क की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को रास्ते का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन अक्सर फिसल जाते हैं, जबकि पैदल चलने वाले, साइकिल सवार और स्कूली बच्चे भी दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह मार्ग किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।

स्कूल जाने से डर रहे बच्चे

ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में बच्चों को स्कूल भेजना सबसे बड़ी चिंता बन गया है। कई बच्चे कीचड़ में गिरकर घायल हो जाते हैं और भीगे कपड़ों तथा गंदे बस्तों के साथ स्कूल पहुंचते हैं। कई अभिभावक हादसों की आशंका के चलते बच्चों को स्कूल भेजने से भी परहेज करने लगे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण कई बार एम्बुलेंस गांव तक पहुंचने में असमर्थ रहती है। ऐसे समय मरीजों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई या अन्य वैकल्पिक साधनों से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे समय पर उपचार मिलने में कठिनाई होती है।

बार-बार शिकायत, लेकिन समाधान नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और जिला प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने और आगामी चुनाव में “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का निर्णय लेने पर मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि पोड़ी–खिरवा मार्ग का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि हजारों लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

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