एक घंटे की झमाझम बारिश से बदला मौसम का मिजाज, धान बुवाई की उम्मीदों को मिले पंख,उमरियापान-ढीमरखेड़ा में मेघों की मेहरबानी, बारिश से किसानों के खिले चेहरे; जिले में अब भी सामान्य से 75.4% कम वर्षा दर्ज
कलयुग की कलम से राकेश यादव

एक घंटे की झमाझम बारिश से बदला मौसम का मिजाज, धान बुवाई की उम्मीदों को मिले पंख,उमरियापान-ढीमरखेड़ा में मेघों की मेहरबानी, बारिश से किसानों के खिले चेहरे; जिले में अब भी सामान्य से 75.4% कम वर्षा दर्ज
कलयुग की कलम उमरिया पान ढीमरखेड़ा – लंबे इंतजार के बाद गुरुवार आज सुबह उमरियापान और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में करीब एक घंटे तक हुई झमाझम बारिश ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी। धान की बुवाई के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे किसानों ने राहत की सांस ली। खेतों में नमी आने से अब बुवाई कार्य में तेजी आने की उम्मीद है और ग्रामीण अंचलों में बारिश को लेकर उत्साह का माहौल देखा गया।
हालांकि जिले में मानसून की रफ्तार अभी भी सामान्य से काफी पीछे है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 1 जुलाई तक कटनी जिले में 44.4 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई 180.6 मिलीमीटर वर्षा की तुलना में 75.4 प्रतिशत कम है। इससे स्पष्ट है कि शुरुआती मानसून में इस बार बारिश अपेक्षाकृत कमजोर रही है।
रीठी सबसे आगे, ढीमरखेड़ा सबसे पीछे
अधीक्षक भू-अभिलेख मुन्ना लाल तिवारी के अनुसार जिले की विभिन्न तहसीलों में वर्षा का वितरण असमान रहा है। इस अवधि में रीठी तहसील में सबसे अधिक 80.6 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई, जबकि ढीमरखेड़ा तहसील में सबसे कम 9.9 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
अन्य तहसीलों में कटनी में 49.2 मिलीमीटर, बड़वारा में 12 मिलीमीटर, बरही में 54.8 मिलीमीटर, विजयराघवगढ़ में 67.4 मिलीमीटर, बहोरीबंद में 30.2 मिलीमीटर तथा स्लीमनाबाद में 50.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है।
पिछले साल का रिकॉर्ड अब भी बरकरार
पिछले वर्ष इसी अवधि में जिले में 180.6 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज हुई थी। उस समय स्लीमनाबाद तहसील में रिकॉर्ड 286.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इसके मुकाबले इस वर्ष अब तक बारिश का आंकड़ा काफी कम है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही थी।
किसानों की उम्मीदें फिर जागीं
उमरियापान और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में हुई ताजा बारिश ने धान उत्पादक किसानों में नई उम्मीद जगा दी है। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में इसी तरह नियमित वर्षा होती रही तो धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई समय पर पूरी हो सकेगी और उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। फिलहाल सभी की निगाहें अब मानसून की अगली बारिश पर टिकी हैं।



