मध्यप्रदेश

एमपी के दमोह जिले से मन को विचलित कर देने वाली ये तस्वीरें देख कर प्रशासन की संवेदनशीलता पर उठे सवाल, मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के नियम भी किए दरकिनार..

कलयुग की कलम से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में नगर परिषद की कारगुजारी ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एक अज्ञात शव को लावारिस घोषित करते हुए, जहां कचरा गाड़ी में डालकर ले जाया गया, वहीं शव को कचरा निपटान स्थल पर ही दफना दिया गया।

यह है पूरा मामला

दरअसल बगदरी के जंगल में पेड़ से लटका 4-5 दिन पुराना अज्ञात शव मिला। पुलिस ने शिनाख्त की कोशिश की, लेकिन मृतक की पहचान नहीं हो सकी। पुलिस ने शव को लावारिस घोषित कर नगर परिषद को शव दफनाने का मेमो दे दिया। बस! फिर क्या नगर परिषद के कर्मचारियों कचरे से भरी गाड़ी में शव रखा। शनिवार शाम खकरिया मार्ग पर वार्ड-9 स्थित सांदीपनि विद्यालय एवं कॉलेज के पास वहां दफना दिया, जहां कचरा निपटान होता है।

बता दें कि भारत एक ऐसा देश है जहां अज्ञात या लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए भी सम्मानजनक प्रक्रिया तय की गई है। मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट भी इसे लेकर कई बार कह चुके हैं कि हर व्यक्ति को मृत्यु के बाद गरिमा मिलनी चाहिए। नियमानुसार इसके लिए अलग से शव वाहन और सुरक्षित स्थान तय किए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शव को कचरा गाड़ी में ले जाना और कचरा स्थल पर ही दफनाना अमानवीयता और भावना शून्यता है। उनका सवाल है कि हमारे समाज और प्रशासन की संवेदनशीलता कहां खोती जा रही है।

पहचान नहीं तो क्या हुआ, किसी का तो अपना होगा ये अज्ञात

जिस शव को लावारिस घोषित करते हुए नगर परिषद ने इस तरह दफनाया वो किसी का तो अपना होगा, उसका अपना कोई परिवार तो होगा। कई बार गुमशुदगी, मानसिक बीमारी और मजदूरी के लिए लोग पलायन करने को मजबूर होते हैं, परिवार टूटने पर उससे अलग रहते हैं। लेकिन अगर ऐसे मामलों में शव की पहचान नहीं हो सकी, तो क्या उसके साथ ऐसा व्यवहार किया जाना सही है? दुनिया छोड़ चुके इन लावारिस लोगों के परिवार बरसों तक इनके लौटने का इंतजार करते हैं।

इधर में नगर निरीक्षक के स्टेटमेंट ने भी चौंका दिया है। उनका कहना है कि शव ज्यादा पुराना है इसलिए नगर परिषद को पत्र लिखकर उसे दफनाने को कहा था। शव ले जाना और दफनाना परिषद का काम है। उनके इस जवाब ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतिम संस्कार चाहे जैसे हुआ हो, जैसे उन्हें इससे कोई मतलब ही नहीं था।

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