जैविक खेती की ओर बढ़ते कदम: विद्यार्थियों को मिला ऑर्गेनिक प्रमाणन का तकनीकी प्रशिक्षण
कलयुग की कलम से राकेश यादव

जैविक खेती की ओर बढ़ते कदम: विद्यार्थियों को मिला ऑर्गेनिक प्रमाणन का तकनीकी प्रशिक्षण
कलयुग की कलम स्लीमनाबाद – स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय स्लीमनाबाद में स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए जैविक कृषि उत्पादन प्रमाणीकरण विषय पर तकनीकी प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सरिता पांडे के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे ने विद्यार्थियों को जैविक खेती और उसके प्रमाणीकरण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ ने बताया कि जैविक खेती ऐसी कृषि प्रणाली है जो प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखते हुए सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्रदान करती है। इस पद्धति में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, जल धारण क्षमता में सुधार होता है तथा पर्यावरण प्रदूषण से बचाव होता है।
उन्होंने बताया कि बाजार में जैविक कृषि उत्पादों को बेचने के लिए उनका प्रमाणित होना आवश्यक है। इसके लिए जैविक उत्पादन की विभिन्न अवस्थाओं—जैसे उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण—का निर्धारित जैविक मानकों के आधार पर प्रमाणीकरण संस्थाओं द्वारा निरीक्षण किया जाता है। सभी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद कृषक को जैविक उत्पादन का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा जैविक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था का गठन किया गया है, जो सहभागिता गारंटी प्रणाली के अंतर्गत उत्पादों का प्रमाणीकरण करती है। प्रमाणन के बाद उत्पादों पर इंडिया ऑर्गेनिक मार्क लगाया जाता है, जो उनके जैविक मानकों पर खरा उतरने की गारंटी देता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को जैविक कृषि उत्पादन प्रमाणीकरण की आवश्यकता, मानक, अनुपालन प्रक्रिया, योजना निर्माण, निरीक्षण प्रणाली तथा भारत में लागू प्रमाणीकरण तंत्र के बारे में भी विस्तृत तकनीकी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को जैविक खेती के वैज्ञानिक पहलुओं और इसके बढ़ते महत्व को समझने का अवसर मिला।



