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जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा उमरियापान, धूमधाम से निकली प्रभु श्रीराम की भव्य बारात,न्यू बस स्टैंड से झंडा चौक तक हुआ जगह-जगह स्वागत, सीता-राम वरमाला प्रसंग ने मोहा मन; लक्ष्मण-परशुराम संवाद पर दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

कलयुग की कलम से राकेश यादव

जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा उमरियापान, धूमधाम से निकली प्रभु श्रीराम की भव्य बारात,न्यू बस स्टैंड से झंडा चौक तक हुआ जगह-जगह स्वागत, सीता-राम वरमाला प्रसंग ने मोहा मन; लक्ष्मण-परशुराम संवाद पर दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

कलयुग की कलम उमरिया पान – कटरा बाजार में आयोजित भव्य रामलीला के दौरान प्रभु श्रीरामचंद्र जी की बारात धूमधाम से निकाली गई। नगर भ्रमण के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं और दुर्गा उत्सव समितियों ने बारात का आत्मीय स्वागत किया। जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा नगर भक्तिमय हो उठा। रामलीला में सीता स्वयंवर, शिवधनुष भंग, वरमाला और लक्ष्मण-परशुराम संवाद के सजीव मंचन ने दर्शकों का मन मोह लिया।

न्यू बस स्टैंड समिति ने किया भव्य स्वागत

प्रभु श्रीराम की बारात न्यू बस स्टैंड पहुंची, जहां दुर्गा उत्सव समिति ने श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद बारात नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए झंडा चौक पहुंची। रास्ते भर भक्तों ने जयकारों के साथ बारात का अभिनंदन किया।

झंडा चौक पर जलपान और स्वल्पाहार की व्यवस्था

झंडा चौक सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति ने बारात का पारंपरिक तरीके से स्वागत करते हुए बारातियों के लिए जलपान एवं स्वल्पाहार की व्यवस्था की। समिति सदस्यों ने श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिनंदन किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था का वातावरण बना रहा।

शिवधनुष टूटते ही गूंजे जयकारे, माता सीता ने पहनाई वरमाला

रामलीला का प्रमुख आकर्षण सीता स्वयंवर प्रसंग रहा। मंचन के अनुसार, राजा जनक के स्वयंवर में अनेक राजा शिवधनुष उठाने में असफल रहे। महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम ने धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय शिवधनुष भंग हो गया। इसके साथ ही स्वयंवर स्थल जयकारों से गूंज उठा।

इसके बाद माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला पहनाई। इस मनोहारी दृश्य पर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। विवाह प्रसंग के मंचन ने रामलीला की भव्यता को और बढ़ा दिया।

लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने बांधा समां

शिवधनुष भंग होने का समाचार सुनकर भगवान परशुराम स्वयंवर स्थल पहुंचे। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुए तीखे संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। लक्ष्मण जी के निर्भीक उत्तर और परशुराम जी के क्रोधपूर्ण संवादों ने दर्शकों को बांधे रखा।

वहीं, प्रभु श्रीराम ने विनम्रता, धैर्य और मर्यादा का परिचय देते हुए परशुराम जी के प्रति आदरभाव प्रकट किया। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने दर्शकों को संयम, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

रामलीला से जीवंत हो रही धार्मिक परंपराएं

कटरा बाजार में आयोजित रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। भव्य बारात, समितियों द्वारा स्वागत, सीता-राम विवाह और लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने आयोजन को यादगार बना दिया। धार्मिक कार्यक्रम के चलते उमरियापान में उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है। रामलीला के जरिए श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

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