धरती को हराभरा बनाने का संकल्प: ढीमरखेड़ा न्यायालय परिसर में न्यायाधीश ने किया पौधरोपण, दिया पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक संदेश,”वन हैं तो जीवन है”— अधिक से अधिक पौधे लगाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करें प्रकृति की अमूल्य धरोहर
कलयुग की कलम से राकेश यादव

धरती को हराभरा बनाने का संकल्प: ढीमरखेड़ा न्यायालय परिसर में न्यायाधीश ने किया पौधरोपण, दिया पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक संदेश,“वन हैं तो जीवन है”— अधिक से अधिक पौधे लगाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करें प्रकृति की अमूल्य धरोहर
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से गुरुवार को ढीमरखेड़ा न्यायालय परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर न्यायालय परिसर में पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया तथा लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की गई।
यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के पालन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री जितेन्द्र कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान माननीय न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने न्यायालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जिस प्रकार “जल है तो कल है” का संदेश जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार “वन हैं तो जीवन है” भी उतना ही आवश्यक है। पृथ्वी पर जीवन का आधार स्वच्छ वातावरण और पर्याप्त हरियाली है। वृक्ष केवल छाया और फल ही नहीं देते, बल्कि मानव जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन का प्रमुख स्रोत भी हैं। उन्होंने कहा कि भोजन के बिना मनुष्य कुछ समय तक जीवित रह सकता है, लेकिन ऑक्सीजन के बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है।
उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अधिक से अधिक पौधे लगाए और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाए। केवल पौधरोपण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और समाज में हरित चेतना विकसित करने का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।



