ढीमरखेड़ा- समय बदला, तारीख बदली, सियासत बदली और नौकरशाह भी बदले, लेकिन नहीं बदली तो कटनी जिले के ढीमरखेड़ा मुख्यालय के सरकारी दफ्तरों की तस्वीर। जी हां, हम बात कर रहे हैं कटनी जिले के ढीमरखेड़ा में स्थित सरकारी दफ्तरों की। जहां अप-डाउन संस्कृति का वायरस जमकर फैला हुआ है। यहां पदस्थ अधिकारी कर्मचारी अप-डाउन के वायरस से बुरी तरह ग्रसित हैं। बताया गया कि जनपद पंचायत के मुखिया स्वयं शाम ढलते ही मुख्यालय छोड़कर गायब हो जाते हैं। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत कार्यालय में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी कटनी, जबलपुर सहित अन्य शहरों से अप-डाउन कर अप-डाउन संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। जिसके चलते लोगों के विभाग से संबंधित कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। देखा गया कि यहां दोपहर में बारह बजे तक अधिकारी कर्मचारी कार्यालय पहुंचते हैं और तीन बजते ही घर वापसी की तैयारी में लग जाते हैं। सवाल करने पर एक ही जवाब होता है कि फील्ड पर थे।
ढीमरखेड़ा को नहीं बनाया मुख्यालय
ग्रामीणों की मानें तो ढीमरखेड़ा के जनपद पंचायत कार्यालय में पदस्थ सीईओ ने तो एक लंबा समय गुजर जाने के बाद भी सेवा स्थल ढीमरखेड़ा को आज तक मुख्यालय नहीं बनाया है। इससे ही कार्यालय के अन्य कर्मचारियों की कार्यप्रणाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। बताया जाता है कि सीईओ साहब अप-डाउन कर ढीमरखेड़ा में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं कार्यालय में पदस्थ अन्य कर्मचारी भी देर से आना अपना अधिकार समझते हैं। सूत्रों की मानें तो जिम्मेदारों की अप-डाउन प्रथा का फायदा अवैध कारोबारी भी जमकर उठा रहे हैं। माननीयों के ढीमरखेड़ा मुख्यालय से गायब होते ही क्षेत्र में अवैध गतिविधियां चरम पर आ जाती है।
समय से अधिकारी नहीं आते दफ्तर
देखा गया कि ढीमरखेड़ा के जनपद पंचायत कार्यालय, तहसील कार्यालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, कृषि विभाग, सिंचाई विभाग के दफ्तर समय से नहीं खुलते हैं। यहां आधे से अधिक कर्मचारी अप-डाउन कर जब दोपहर में मुख्यालय पहुंचते हैं तब जाकर दफ्तरों का संचालन हो पाता है। बताया गया कि यहां तैनात कई कर्मचारी जबलपुर, कटनी सहित अन्य शहरों से प्रतिदिन अप-डाउन करते हैं। इससे ही सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब जबलपुर से प्रतिदिन अप-डाउन करने वाला कर्मचारी कितने समय मुख्यालय में बैठकर सेवाएं देता होगा।
तहसील कार्यालय के भी यही हाल
मुख्यालय के विभागों में सबसे मरणासन्न स्थिति ढीमरखेड़ा के तहसील कार्यालय की है। यहां भी अप-डाउन का वायरस फैला हुआ है। खास बात तो यह है कि इस ओर न तो जिले के जिम्मेदार अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि ही। जिसके चलते अधिकारी कर्मचारी मनमानी करने पर उतारू हैं और आम लोग परेशान हैं। अप-डाउन प्रथा पर रोक लगने के बाद भी अधिकारी कर्मचारी नियमों को दरकिनार कर प्रतिदिन अप-डाउन कर रहे हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिरकार कब सुधरेंगे ढीमरखेड़ा मुख्यालय के सरकारी दफ्तरों के हाल।