मध्यप्रदेश

ढीमरखेड़ा ग्राम गोपालपुर के पी एम श्री स्कूल में मारपीट और धमकी का मामला जातिगत टिप्पणी और कमीशन मांगने के आरोपों से मचा हड़कंप छात्रों के साथ मारपीट के बाद शिकायत वापस लेने पर धमकी स्कूल फंड से कमीशन की मांग और जातिगत अपमान पर भाजपा नेता ने आंदोलन की दी चेतावनी

कलयुग की कलम से राकेश यादव

ढीमरखेड़ा ग्राम गोपालपुर के पी एम श्री स्कूल में मारपीट और धमकी का मामला जातिगत टिप्पणी और कमीशन मांगने के आरोपों से मचा हड़कंप छात्रों के साथ मारपीट के बाद शिकायत वापस लेने पर धमकी स्कूल फंड से कमीशन की मांग और जातिगत अपमान पर भाजपा नेता ने आंदोलन की दी चेतावनी

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा-ग्राम गोपालपुर के पी एम श्री स्कूल में हाल ही में हुई एक घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। स्कूल के प्रभारी प्राचार्य गणेश यादव पर तीन छात्र आकाश चौधरी, दुर्गेश लोधी और अश्वनी लोधी से मारपीट करने का आरोप लगा था। इस आरोप के बाद छात्रों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में छात्रों ने अपनी गलती मानते हुए शिकायत वापस ले ली।

प्रभारी प्राचार्य गणेश यादव ने बताया कि पूरा मामला निराधार है षड्यंत्र के तहत फसाने की कोशिश की जा रही है

शिकायत वापस लेने के बाद स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। छात्र आकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि शिक्षिका दुर्गेश राय, उनके पति आलोक राय, बेड़ीलाल साहू और अरविन्द तिवारी ने उन्हें धमकी दी और जातिगत अपमान किया।

आकाश ने कहा कि उन्हें धमकी दी गई कि “तुमने शिकायत क्यों वापस ली और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपमानित किया गया।

इस घटना के साक्षी, स्कूल के चपरासी शिवकुमार लोधी ने भी कहा कि सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम चल रहा था, जब शिक्षिका दुर्गेश राय ने गांव के कुछ लोगों को बुलाकर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करवाया और आकाश चौधरी को जातिगत अपमानित किया गया।

प्रभारी प्राचार्य गणेश यादव ने बताया कि गांव के कुछ लोगों ने आकाश चौधरी को जातिगत अपशब्द कहे। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि एक स्थानीय नेता जो खुद को प्रतिष्ठित नेता बताता है, उन्हें लंबे समय से परेशान कर रहा है। इस नेता ने स्कूल फंड से 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी, और जब यादव ने इसे मानने से इंकार कर दिया तो उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई।

यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। भाजपा के अनुसूचित जाति के जिला मंत्री गोविन्द बागरी ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में न्याय नहीं हुआ तो वह दलित समुदाय के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।

इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन पर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का दबाव बढ़ता जा रहा है ताकि छात्रों और स्कूल प्रशासन को न्याय मिल सके और गांव में शांति बहाल हो सके। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।

इस घटना ने ना सिर्फ स्कूल बल्कि पूरे गांव में एक सामाजिक और राजनीतिक बहस छेड़ दी है। लोगों में असुरक्षा का माहौल बन गया है, और वे प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जनता की नजरें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।

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