7 फरवरी से शुरू होगा गेहूँ समर्थन मूल्य पंजीयन ₹2585 प्रति क्विंटल एमएसपी, किसानों को सीधा लाभ
कलयुग की कलम से राकेश यादव

7 फरवरी से शुरू होगा गेहूँ समर्थन मूल्य पंजीयन ₹2585 प्रति क्विंटल एमएसपी, किसानों को सीधा लाभ
कलयुग की कलम कटनी -जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन 7 फरवरी से शुरू होकर 7 मार्च तक किया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा घोषित ₹2585 प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य से इस वर्ष किसानों को बेहतर दाम मिलेगा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। जिला प्रशासन ने पंजीयन प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने की पूरी तैयारी कर ली है।
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने किसानों से अपील की है कि वे समय-सीमा के भीतर पंजीयन कराएं, ताकि समर्थन मूल्य पर गेहूँ विक्रय में किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर प्राप्त हो।
जिले में निःशुल्क पंजीयन की सुविधा ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत कार्यालयों, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों तथा सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। वहीं, एमपी ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र एवं निजी साइबर कैफे के माध्यम से सशुल्क पंजीयन की व्यवस्था भी की गई है, जिसमें प्रति पंजीयन अधिकतम 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया जाएगा।
पंजीयन के समय किसानों को भूमि से संबंधित दस्तावेज, आधार कार्ड एवं फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। विशेष श्रेणी के किसान जैसे सिकमी, बटाईदार, कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन केवल सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाएगा, जिनका सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
समर्थन मूल्य पर विक्रय की गई गेहूँ की उपज का भुगतान किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। यदि किसी कारणवश आधार लिंक खाते में भुगतान संभव नहीं होता है, तो पंजीयन के दौरान दर्ज वैकल्पिक बैंक खाते में राशि जमा की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अक्रियाशील, संयुक्त तथा फिनो, एयरटेल और पेटीएम जैसे खातों को मान्य नहीं किया जाएगा।
पंजीयन और उपार्जन के लिए आधार नंबर का सत्यापन अनिवार्य रहेगा, जो ओटीपी या बायोमेट्रिक माध्यम से किया जाएगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में नाम की विसंगति होने पर तहसील स्तर पर सत्यापन के बाद ही पंजीयन मान्य होगा।
जिला प्रशासन द्वारा किसानों को एसएमएस के माध्यम से सूचना, गांवों में डोंडी पिटवाकर प्रचार, पंचायतों के सूचना पटल पर जानकारी और मंडी-समिति स्तर पर बैनर लगाकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पंजीयन की प्रक्रिया समय पर और व्यवस्थित ढंग से पूर्ण कराई जाए, ताकि किसानों को पूरा लाभ मिल सके।



