जांबाजों के नाम पर वार्ड, इतिहास रचता उमरियापान देश में पहली बार पूरी नगर परिषद को मिला परमवीर शौर्य का गौरव राष्ट्रभक्ति, शौर्य और बलिदान की भावना को जन-जन तक पहुंचाने वाला नगर,
कलयुग की कलम से राकेश यादव

जांबाजों के नाम पर वार्ड, इतिहास रचता उमरियापान देश में पहली बार पूरी नगर परिषद को मिला परमवीर शौर्य का गौरव राष्ट्रभक्ति, शौर्य और बलिदान की भावना को जन-जन तक पहुंचाने वाला नगर,
कलयुग की कलम उमरिया पान -मध्यप्रदेश के कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील में नवगठित नगर परिषद उमरियापान ने देशभर में एक अनूठा और प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। उमरियापान संभवतः देश की पहली ऐसी नगर परिषद बन गई है, जिसके सभी 15 वार्डों का नाम भारत के परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा गया है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि राष्ट्रभक्ति, शौर्य और बलिदान की भावना को जन-जन तक पहुंचाने वाला भी है।
मध्यप्रदेश शासन के असाधारण राजपत्र में 31 दिसंबर 2025 को विधिवत रूप से वार्डों के सीमांकन एवं नामकरण की अधिसूचना प्रकाशित हो चुकी है। जिला कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के मार्गदर्शन में जारी इस अधिसूचना के तहत उमरियापान नगर परिषद के हर वार्ड को देश के उन अमर सपूतों के नाम समर्पित किया गया है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया।
यह पहल नगर निकाय अधिनियम एवं शासन के नामकरण संबंधी नियमों के अनुरूप की गई है, जिसमें सार्वजनिक स्थलों एवं वार्डों के नामकरण हेतु महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों एवं राष्ट्रीय गौरव से जुड़े व्यक्तित्वों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। उमरियापान नगर परिषद का यह निर्णय उसी भावना का सशक्त उदाहरण है।
अब उमरियापान की गलियां, चौक-चौराहे और वार्ड केवल प्रशासनिक इकाइयां नहीं, बल्कि परमवीर शौर्य गाथाओं के जीवंत प्रतीक बन गए हैं। यह नामकरण आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सेना के अद्भुत पराक्रम, त्याग और देशप्रेम से परिचित कराएगा।
ये हैं उमरियापान नगर परिषद के 15 शौर्य-समर्पित वार्ड
वार्ड क्रमांक 1 – मेजर पीरू सिंह शेखावत
1948 में टिथवाल सेक्टर में अदम्य साहस का परिचय देते हुए अकेले दम पर दुश्मन की चौकियों पर कब्जा करने वाले मेजर पीरू सिंह वीरगति को प्राप्त हुए।
वार्ड क्रमांक 2 – मेजर धन सिंह थापा
1962 के भारत-चीन युद्ध में लद्दाख मोर्चे पर अद्वितीय साहस दिखाने वाले मेजर थापा परमवीर चक्र से सम्मानित हुए।
वार्ड क्रमांक 3 – मेजर होशियार सिंह
1971 के भारत-पाक युद्ध में सकरगढ़ सेक्टर में दुश्मन को करारी शिकस्त देने वाले वीर योद्धा।
वार्ड क्रमांक 4 – कैप्टन विक्रम बत्रा
कारगिल युद्ध के ‘शेरशाह’ कैप्टन बत्रा ने दुश्मन से दो महत्वपूर्ण चोटियां मुक्त कराईं और अमर हो गए।
वार्ड क्रमांक 5 – सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल
1971 के युद्ध में अद्भुत वीरता दिखाते हुए सर्वोच्च बलिदान।
वार्ड क्रमांक 6 – मेजर सोमनाथ शर्मा
देश के पहले परमवीर चक्र विजेता, 1947 में कश्मीर रक्षा के दौरान वीरगति।
वार्ड क्रमांक 7 – मेजर शैतान सिंह
1962 के भारत-चीन युद्ध में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर दुश्मन को रोकने वाले रणबांकुरे।
वार्ड क्रमांक 8 – सूबेदार जोगिंदर सिंह
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद दुश्मन पर आक्रमण जारी रखने वाले वीर।
वार्ड क्रमांक 9 – कैप्टन मनोज कुमार पांडे
कारगिल युद्ध में 24 वर्ष की आयु में शौर्य की अमिट मिसाल।
वार्ड क्रमांक 10 – मेजर रामास्वामी परमेश्वरन
1987 में श्रीलंका शांति मिशन के दौरान असाधारण साहस का परिचय।
वार्ड क्रमांक 11 – सेकेंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे
1948 में लगातार तीन दिन दुश्मन से लड़कर विजय पथ प्रशस्त किया।
वार्ड क्रमांक 12 – शहीद अब्दुल हमीद
1965 के युद्ध में खेमकरण सेक्टर में दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त किया।
वार्ड क्रमांक 13 – शहीद अल्बर्ट एक्का
1971 के युद्ध में घायल अवस्था में भी दुश्मन के बंकर उड़ा दिए।
वार्ड क्रमांक 14 – कैप्टन गुरबचन सिंह सालारिया
1961 में कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान वीरता का परिचय।
वार्ड क्रमांक 15 – लांस नायक करम सिंह
1947-48 के युद्ध में तिथवाल सेक्टर में अदम्य साहस के प्रतीक।
राष्ट्रभक्ति का स्थायी स्मारक
उमरियापान नगर परिषद का यह निर्णय प्रशासनिक सीमाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय चेतना और सम्मान की मिसाल बन गया है। यह पहल न केवल स्थानीय नागरिकों में गौरव की अनुभूति कराएगी, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित होगी।



