इंदौर के भागीरथपुरा में तीन दिन में दूषित पानी पीने के बाद उल्टी-दस्त का शिकार आठ लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग इसे मानने से इनकार कर रहा है लेकिन परिजन उल्टी-दस्त से तबीयत खराब होने व फिर मौत की बात कह रहे हैं। बड़ा खुलासा ये है कि एक छोटे से लीकेज ने इस क्षेत्र में हाहाकार मचा दिया। 7 दिन बाद मिले इस लीकेज ने अफसरों की लारपवाही की इंतहा की पोल खोल कर रख दी। इसकी वजह से दूषित हुए पानी से बीमार 110 से ज्यादा प्रभावित लोग अस्पतालों में भर्ती हैं।
इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने गलियों में कैंप लगाए हैं, जिनके माध्यम से लगभग 1100 मरीज उल्टी, दस्त, पेट दर्द की दवा लेकर गए हैं। लोगों के अनुसार 10-12 दिनों से दवा युक्त व गंदा पानी सप्लाई हो रहा था, जिसके कारण यह स्थिति बनी। एक पीड़ित बच्चे की जांच रिपोर्ट में हैजे की पुष्टि हुई है। मामले में सीएम के संज्ञान लेने के बाद अफसर हरकत में आए। दो को निलंबित किया गया है, वहीं एक को सेवा से पृथक कर दिया गया है।
टीम ने चलाया जांच अभियान
भागीरथपुरा में मंगलवार को मेडिकल कॉलेज व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच अभियान चलाया। हर गली में टीम बैठाई गई व एनएएम व आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों की जानकारी ली। पानी के सैंपल लिए। स्वास्थ्य विभाग ने अन्य क्षेत्रों से भी डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ को ड्यूटी पर लगाया।
इतने मरीजों की तबीयत बिगडऩे व कुछ की मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सही आंकड़ा जारी नहीं कर रहा। सीएमएचओ ने अभी तक उल्टी-दस्त से किसी की मौत नहीं होने की बात कही है। इधर लोगों में दहशत का माहौल है। इधर नगर निगम टीम ने भी सीवेज लाइन साफ-सफाई अभियान चलाया है।
तीन लोगों की मौत डायरिया से…
पुष्टि हुई देर रात भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त से मौतों के मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जानकारी दी गई। विभाग द्वारा मामले में एक पुरुष व दो महिलाओं की मृत्यु की पुष्टि की गई। 70 वर्षीय नन्दलाल पाल, 60 वर्षीय उर्मिला यादव और 65 वर्षीय उमा कोरी की मृत्यु डायरिया से होना बताया।
तीन साल के बच्चे को हैजा
रिपोर्ट में पुष्टि भागीरथपुरा के मरीजों को निजी अस्पताल सहित एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है। चाचा नेहरू अस्पताल में तीन साल का बच्चा भर्ती है, जिसकी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज की माइक्रो बायोलॉजी विभाग की लैब में सैंपल भेजे गए थे। सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट में हैजा की पुष्टि हुई है।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन? आप खुद देखिए
जिस पाइप लाइन में लीकेज, उसे बदलने का टेंडर एक साल पहले जारी, वर्कऑर्डर नहीं
जिस पाइपलाइन में लीकेज मिला है, उसे बदलने के लिए नवंबर में ही टेंडर फाइनल हो चुका था, लेकिन अब तक वर्कऑर्डर जारी नहीं किया गया। इसी कारण ठेकेदार ने काम शुरू नहीं किया। अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी का खमियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा। इस विभाग का प्रभार अपर आयुक्त रोहित सिसौनिया के पास है। यही वे अधिकारी हैं जिन्होंने पहले ड्रेनेज और नर्मदा लाइन के काम को लेकर महापौर और एमआइसी सदस्यों को करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करवाया था।