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कड़ाके की ठंड ने उजाड़े पान बरेजे, राजस्व व कृषि विभाग के अमले ने किया सर्वे नियम-कानून होने के बावजूद आर्थिक सहायता से वंचित, पान किसान जीवन-यापन पर मंडराया संकट

कलयुग की कलम से राकेश यादव

कड़ाके की ठंड ने उजाड़े पान बरेजे, राजस्व व कृषि विभाग के अमले ने किया सर्वे नियम-कानून होने के बावजूद आर्थिक सहायता से वंचित, पान किसान जीवन-यापन पर मंडराया संकट

कलयुग की कलम उमरिया पान-कड़ाके की ठंड ने इस बार पान उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। क्षेत्र में अत्यधिक ठंड के चलते पान बरेजों में लगी फसल गलकर झर गई और देखते ही देखते पूरी की पूरी फसल चौपट हो गई। पान बरेजा बनाकर जीवन-यापन करने वाले सैकड़ों किसान आज तबाही की कगार पर खड़े हैं। जिन पान बरेजों से घर की रोजी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार का भरण-पोषण चलता था, वही बरेजे अब नुकसान और निराशा की तस्वीर बन चुके हैं।

oplus_34पान किसानों की गंभीर स्थिति को देखते हुए और उनके द्वारा पूर्व में शासन-प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन के बाद उच्च अधिकारियों के निर्देशन में राजस्व अमले, पटवारी टीम और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने पान बरेजों में पहुंचकर फसल नुकसान का सर्वे किया। यह सर्वे ढीमरखेड़ा एसडीएम निधि गोहेल के निर्देशानुसार उमरियापान नायब तहसीलदार साक्षी शुक्ला के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा किया गया।

प्रशासनिक निर्देशों पर संयुक्त टीम का मैदानी सर्वे

सर्वे के दौरान पटवारी हल्का नंबर 23 बम्हनी के हल्का पटवारी अनिल गौटिया, सौरभ गर्ग, शैलेंद्र झरिया मौजूद रहे। कृषि विभाग की ओर से कुमारी निशा सोलंकी, श्रीमती स्नेह लता कोरचे एवं श्रीमती अश्विनी पटेल ने भी मौके पर पहुंचकर फसल की स्थिति का जायजा लिया। ग्राम स्तर पर कोटवार आनंद दहिया एवं नेमचंद दहिया की उपस्थिति रही, वहीं सामाजिक सहभागिता के तहत DCS लोकल यूथ से रणजीत चक्रवर्ती एवं शुभम लोधी भी टीम के साथ रहे।

टीम ने ग्राम क्षेत्र के विभिन्न पान बरेजों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति को देखा। इस दौरान पान उत्पादक किसान ज्ञानचंद चौरसिया, कमलेश चौरसिया, राजेश चौरसिया, बृजेश चौरसिया, रामकुमार चौरसिया एवं दुर्गेश चौरसिया सहित अन्य किसानों ने अपनी-अपनी पान की फसल सर्वे टीम को दिखाई और नुकसान की जानकारी दी।

“पूरी फसल चौपट, अब आगे क्या?”

पान किसानों ने सर्वे टीम को बताया कि इस बार ठंड सामान्य से कहीं अधिक पड़ी। पान की नाजुक फसल अत्यधिक ठंड सहन नहीं कर सकी, जिसके चलते पत्तियां गलने लगीं और धीरे-धीरे झरकर पूरी फसल नष्ट हो गई। किसानों का कहना है कि उन्होंने बरेज तैयार करने में कर्ज लिया, मेहनत और समय लगाया, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ खत्म कर दिया।

किसानों ने भावुक शब्दों में बताया कि पान की खेती उनके लिए सिर्फ व्यवसाय नहीं बल्कि जीवन का आधार है। इसी से घर का खर्च, बच्चों की शिक्षा, कपड़े-लत्ते और दवाइयों तक की व्यवस्था होती है। फसल नष्ट होने के बाद अब उनके सामने दो वक्त की रोटी तक का संकट खड़ा हो गया है।

नियम-कानून हैं, फिर भी क्यों नहीं मिल रहा मुआवजा?

पान उत्पादकों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन के नियमों में फसल क्षति होने पर मुआवजा देने का स्पष्ट प्रावधान है, तो फिर उन्हें इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा। किसानों ने बताया कि शासन की ओर से पहले से यह प्रावधान है कि फसल की क्षति होने पर ₹500 प्रति पारी के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद पान किसान वर्षों से इस सहायता से वंचित हैं।

किसानों का कहना है कि वे बार-बार आवेदन, ज्ञापन और शिकायतें करते हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहता है। इस बार भी यदि सर्वे के बाद उचित मुआवजा नहीं मिला, तो उनके लिए खेती दोबारा शुरू करना असंभव हो जाएगा।

प्रशासन से न्याय की उम्मीद

हालांकि, संयुक्त सर्वे के बाद किसानों में यह उम्मीद जगी है कि अब उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। नायब तहसीलदार साक्षी शुक्ला के नेतृत्व में हुए सर्वे को किसानों ने सकारात्मक कदम बताया और कहा कि यदि रिपोर्ट उच्च अधिकारियों तक सही तरीके से पहुंची, तो शायद उन्हें न्याय मिल सके।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तर पर भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही और मुआवजे को लेकर निर्णय लिया जा सकता है। वहीं कृषि विभाग ने भी नुकसान की स्थिति को गंभीर बताते हुए उचित सहायता की आवश्यकता जताई है।

पान उत्पादक बोले—सहायता नहीं मिली तो टूट जाएगा भरोसा

पान किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा समय रहते आर्थिक सहायता नहीं दी गई, तो उनका भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा। किसानों ने मांग की कि नियम-कानूनों के तहत तत्काल मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे दोबारा पान की खेती कर सकें और अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।

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