आबकारी और थाना प्रभारी बरही की मिलीभगत से खुलेआम बिक रही दारू कोई पाबंद लगाने वाला नहीं है, बरही में अवैध शराब बिक्री प्रशासनिक मिलीभगत और सामाजिक संकट, नहीं रुक रही हैं चोरी कार्यवाही केवल दिखावा
बरही से संदीप तिवारी की खबर

आबकारी और थाना प्रभारी बरही की मिलीभगत से खुलेआम बिक रही दारू कोई पाबंद लगाने वाला नहीं है, बरही में अवैध शराब बिक्री प्रशासनिक मिलीभगत और सामाजिक संकट, नहीं रुक रही हैं चोरी कार्यवाही केवल दिखावा
बरही | गांधी जयंती पर बेधड़क बिक रही शराब जी हां ताजा मामला थाना क्षेत्र बरही का है जहां एक ओर गांधी जयंती और दशहरे का त्यौहार है और नियम के तहत कोई भी शराब दुकानें चालू नहीं हो सकती पर बरही में नियम कुछ और ही है, पुलिस की मिलीभगत से इतने बड़े त्यौहारों में बेधड़क इतने बडे़ कस्बे में चोरी से बेचना कोई ताज्जुब नहीं अगर पुलिस कि मिलीभगत न हो तो लिहाज़ा आए दिन चोरिया भी होती हैं बरही जो कि कटनी जिले की तहसील भी हैं इसके साथ – साथ बड़ा व्यापारिक कस्बा भी है,जहां छुटपुट घटनाएं आम बात है, नगरवासियों ने बताया कि दुर्गा पंडाल में चोर आए और आरती की थाल चुराने कि कोशिश कि जिनमें से एक को पकड़कर नगरवासियों द्वारा उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया गौरतलब हैं कि किसी लायसेंसी दुकान पर यूं चोरी से सटर गिराकर शराब बेंचना पुलिस प्रशासन के कार्याें पर भी प्रश्न खड़े करता है,बल्कि संदेह प्रकट करता हैं और ये सब तब हो रहा हैै जब आए दिन बरही मेे चोरी कि घटनाएं हो रही हैं। बरही क्षेत्र में इन दिनों एक बेहद गंभीर समस्या सामने आ रही है। यहाँ नवरात्रि पर्व और महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर जब पूरे प्रदेश में सरकार की ओर से शराब दुकानों को बंद रखने का आदेश जारी होता है, तब भी अवैध रूप से शराब की बिक्री बेधड़क चल रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह कारोबार उसी लाइसेंसधारी दुकान के आसपास संचालित हो रहा है, जो इन पावन अवसरों पर सरकारी आदेशानुसार बंद रहती है।
*आदेश और वास्तविकता में फर्क*
राज्य सरकार हर साल धार्मिक और राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर शराब दुकानों को बंद रखने का आदेश देती है। इसका उद्देश्य समाज में धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति सम्मान बनाए रखना है। खासकर नवरात्रि के दिनों में जहाँ माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना होती है, वहाँ शराब जैसी नशे की चीज़ का खुला कारोबार आस्था और परंपरा पर कुठाराघात है।
लेकिन बरही में देखा जा रहा है कि नियम केवल कागज़ों तक सीमित रह जाते हैं। बंद दुकान के ठीक बगल में अवैध रूप से शराब बेची जाती है। शराब माफ़िया खुलेआम अपने नेटवर्क के ज़रिए धंधा चलाते हैं और पुलिस-आबकारी विभाग की मिलीभगत से यह खेल जारी रहता है।
*पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल*
कानून और व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और आबकारी विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आबकारी विभाग का दायित्व है कि वह सुनिश्चित करे कि बिना लाइसेंस शराब की बिक्री न हो। दूसरी तरफ थाना प्रभारी की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र में अवैध कारोबार पर अंकुश लगाए। लेकिन यहाँ उल्टी स्थिति है। आम जनता का आरोप है कि थाना प्रभारी और आबकारी अधिकारी शराब माफ़ियाओं से सांठगांठ कर चुके हैं। उन्हें मासिक “हिस्सा” दिया जाता है, जिसके बदले वे अपनी आँखें मूँद लेते हैं। यह भी देखा गया है कि जब भी इस अवैध कारोबार की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुँचती है, तो औपचारिकता के लिए एक-दो दिन की छापेमारी होती है, मगर कुछ दिनों बाद सब पहले जैसा शुरू हो जाता है।
*शराब माफ़िया का नेटवर्क*
बरही में अवैध शराब कारोबार कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं है। इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम करता है। दुकान बंद होने के बाद रात में गुपचुप शराब की पेटियाँ पहुँचाई जाती हैं। फिर उन्हें इधर-उधर से आने वाले ग्राहकों को ऊँचे दामों पर बेचा जाता है। यहाँ तक कि कुछ लोग छोटी दुकानों, चाय-ढाबों और गली-मोहल्लों में भी इसकी सप्लाई करते हैं। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि हर एक “सेल प्वाइंट” पर पुलिस और आबकारी विभाग को पहले से जानकारी होती है, लेकिन रिश्वत के चलते कोई कार्रवाई नहीं होती।
*जनता की बेबसी और आक्रोश*
आम नागरिक इस स्थिति से बेहद परेशान हैं। नवरात्रि जैसे पावन दिनों में जब लोग मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे होते हैं, उसी समय उनके आसपास शराबियों की टोली हंगामा करती देखी जाती है। इससे न सिर्फ धार्मिक माहौल बिगड़ता है, बल्कि महिलाओं और बच्चों के लिए असुरक्षा की भावना भी बढ़ती है।
कई बार लोग विरोध करने की कोशिश करते हैं, लेकिन शराब माफ़ियाओं का असर इतना मजबूत होता है कि आम जनता डरकर चुप हो जाती है। जो लोग खुलकर आवाज़ उठाते हैं, उन्हें दबाव, धमकी या झूठे मुकदमों का सामना करना पड़ता है।



