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घर टूटा नहीं, संभल गया—वन स्टॉप सेंटर बना उम्मीद की डोर ढीमरखेड़ा के ग्राम बाँध में समझदारी और संवेदनशील पहल से फिर मुस्कराया एक परिवार

कलयुग की कलम से राकेश यादव

घर टूटा नहीं, संभल गया—वन स्टॉप सेंटर बना उम्मीद की डोर ढीमरखेड़ा के ग्राम बाँध में समझदारी और संवेदनशील पहल से फिर मुस्कराया एक परिवार

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा -महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत जिले में संचालित वन स्टॉप सेंटर महिलाओं की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि बिखरते परिवारों को संभालने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र जरूरतमंद महिलाओं के लिए भरोसे का सहारा बन रहा है।

ऐसी ही एक प्रेरक दास्तान विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम बाँध की है। घरेलू विवादों से परेशान श्रीमती सरिता (परिवर्तित नाम) ने अपने तीन वर्षीय बेटी और दो माह के बेटे के साथ घर छोड़ दिया और सहायता की तलाश में कटनी पहुंचीं। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर से संपर्क कर अपनी पीड़ा साझा की।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन स्टॉप सेंटर की टीम ने तत्काल सरिता और उनके बच्चों को रेस्क्यू कर केंद्र में सुरक्षित अस्थायी आश्रय प्रदान किया। सेंटर के प्रशासक ने पूरे धैर्य और संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुनी और पारिवारिक स्थिति को समझने के लिए पति से संपर्क किया। स्वास्थ्य कारणों से पति के केंद्र तक न आ पाने पर, सरिता की सहमति से टीम ने गांव जाकर दोनों को परामर्श देने का निर्णय लिया।

वन स्टॉप सेंटर की टीम सरिता और उनके बच्चों को लेकर उनके घर पहुंची, जहां दंपति को आपसी संवाद, सम्मान और समझदारी से समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित किया गया। परामर्श का सकारात्मक असर हुआ और दोनों ने एक-दूसरे की बात समझते हुए साथ रहने की सहमति जताई।आज सरिता अपने पति और बच्चों के साथ फिर से एक खुशहाल परिवार के रूप में जीवन व्यतीत कर रही हैं।

वन स्टॉप सेंटर की इस संवेदनशील पहल से एक परिवार टूटने से बच गया और विश्वास की जीत हुई।

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