सुविधाओं से वंचित सिलौंडी बस स्टैंड: 84 गांवों के यात्रियों को रोज झेलनी पड़ रही परेशानी
कलयुग की कलम से राकेश यादव

सुविधाओं से वंचित सिलौंडी बस स्टैंड: 84 गांवों के यात्रियों को रोज झेलनी पड़ रही परेशानी
कलयुग की कलम सिलौंडी -आजादी के 78 वर्ष बाद भी क्षेत्र का प्रमुख आवागमन केंद्र बना सिलौंडी बस स्टैंड मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उपेक्षित बना हुआ है। प्रतिदिन लगभग 30 से 40 बसों का आवागमन होने और आसपास के 84 गांवों के लोगों का यहां से आना-जाना होने के बावजूद यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।
बस स्टैंड में सबसे बड़ी समस्या प्रसाधन (शौचालय) की है। महिला यात्रियों, छात्राओं और बुजुर्गों को खुले में जाने या दूरस्थ स्थानों पर सुविधा तलाशने की मजबूरी झेलनी पड़ती है। लाडली बहनों और स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए यह स्थिति अत्यंत असुविधाजनक और असुरक्षित बनी हुई है।
यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय (वेटिंग हॉल) का अभाव भी गंभीर समस्या है। गर्मी, बारिश और ठंड के मौसम में लोग खुले में खड़े रहने को मजबूर हैं। शाम ढलते ही पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने से सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ जाती हैं।
बसों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल न होने के कारण सड़क किनारे अव्यवस्थित खड़ी बसें दुर्घटना की आशंका बढ़ाती हैं। इससे यातायात बाधित होता है और यात्रियों को चढ़ने-उतरने में भी जोखिम उठाना पड़ता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन से लेकर भोपाल स्तर तक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि केवल चुनावी वादों तक विकास सीमित रह गया है, जबकि सिलौंडी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।
पंचायत स्तर पर आवश्यक सुविधाएं
ग्रामीणों और यात्रियों ने बस स्टैंड के समुचित विकास हेतु पंचायत एवं प्रशासन से निम्न सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है—स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालय (महिला व पुरुष अलग-अलग) छायादार प्रतीक्षालय और बैठने की व्यवस्था बसों के लिए व्यवस्थित पार्किंग स्थल पेयजल सुविधा और हैंडपंप/आरओ सिस्टम पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे साफ-सफाई और नियमित कचरा प्रबंधन
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि बस स्टैंड का विकास होने से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि सिलौंडी क्षेत्र की पहचान और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान देता है और यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराता है।



