पारदर्शिता की पाठशाला: दो दिन में बदली प्रशासनिक सोच, सूचना अधिकार पर अफसर हुए प्रशिक्षित”
कलयुग की कलम से राकेश यादव

“पारदर्शिता की पाठशाला: दो दिन में बदली प्रशासनिक सोच, सूचना अधिकार पर अफसर हुए प्रशिक्षित”
कलयुग की कलम कटनी – शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी के तहत संचालित ई-दक्ष केंद्र में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशानुसार आयोजित इस प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के लगभग 30 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की।
यह प्रशिक्षण भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, नई दिल्ली तथा आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के मार्गदर्शन में संचालित सूचना अधिकार परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करते हुए विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिकों को समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, लोक सूचना अधिकारी (PIO) एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी की जिम्मेदारियों, आवेदन प्राप्ति से लेकर निराकरण तक की संपूर्ण प्रक्रिया, समय-सीमा, अपवाद स्वरूप सूचना, दंडात्मक प्रावधान तथा रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
ई-दक्ष केंद्र के वरिष्ठ प्रशिक्षक सुनील त्रिपाठी ने प्रशिक्षण को व्यवहारिक बनाते हुए केस स्टडी, वास्तविक विभागीय उदाहरणों और ऑनलाइन आवेदन प्रबंधन की प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, अपील प्रकरणों के निपटान और नागरिक हित में समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया, जिससे प्रतिभागियों की व्यावहारिक समझ और अधिक मजबूत हुई।
जिला प्रबंधक ई-गवर्नेंस सौरभ नामदेव ने बताया कि कलेक्ट्रेट स्थित ई-दक्ष केंद्र में शासकीय कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए नियमित रूप से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी कड़ी में सूचना के अधिकार अधिनियम पर यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ डिजिटल कार्यकुशलता को भी बढ़ावा देना है।
इस प्रशिक्षण ने न केवल अधिकारियों की समझ को विस्तृत किया, बल्कि शासन और आम नागरिकों के बीच विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुआ।



