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ब्रह्मस्थान करौंदी में गूंजा वेदों का उद्घोष — महर्षि महेश योगी की 109वीं जयंती पर ‘ज्ञानयुग दिवस’ का भव्य आयोजन

कलयुग की कलम से राकेश यादव

ब्रह्मस्थान करौंदी में गूंजा वेदों का उद्घोष — महर्षि महेश योगी की 109वीं जयंती पर ‘ज्ञानयुग दिवस’ का भव्य आयोजन


कलयुग की कलम उमरिया पान -भारत के भौगोलिक केंद्र ब्रह्मस्थान करौंदी स्थित महर्षि आश्रम में विश्वविख्यात ऋषि, वेद मनीषी एवं भावातीत ध्यान के प्रणेता महर्षि महेश योगी की 109वीं जयंती “ज्ञानयुग दिवस समारोह” के रूप में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर आश्रम परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन और गुरु पूजन से आलोकित हो उठा।


कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक गुरु पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वैदिक पंडितों द्वारा शांति पाठ एवं मंगलाचरण ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। अतिथियों का पारंपरिक स्वागत कर उन्हें अंगवस्त्र भेंट किए गए। समारोह में महर्षि जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
समारोह को संबोधित करते हुए आश्रम प्रभारी अरविंद सिंह ने कहा कि “ज्ञानयुग दिवस केवल एक जन्मजयंती नहीं, बल्कि उस चेतना को स्मरण करने का अवसर है, जिसने पूरे विश्व को ध्यान, शिक्षा और संस्कृति की नई दिशा दी।” उन्होंने महर्षि महेश योगी के जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि जी के पास कोई औपचारिक डिग्री नहीं थी, किंतु उनका ज्ञान स्वयं प्रमाण था। वे कहते थे कि “सारा ज्ञान हमारी अपनी चेतना में निहित है और उसी चेतना के जागरण से मानव अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।”
अरविंद सिंह ने बताया कि महर्षि जी द्वारा प्रतिपादित भावातीत ध्यान पद्धति आज विश्व के सैकड़ों देशों में अपनाई जा रही है। अनेक वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि यह ध्यान तनाव, चिंता, अवसाद और मानसिक अशांति से मुक्ति दिलाने में सहायक है। महर्षि का मानना था कि जब व्यक्ति की चेतना शुद्ध होती है, तब समाज और राष्ट्र स्वतः समृद्धि की ओर बढ़ते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने महर्षि जी के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने वेदों के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर विश्व मंच पर भारत की आध्यात्मिक गरिमा को प्रतिष्ठित किया। महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय के प्राध्यापक मानवेंद्र पांडे ने कहा कि महर्षि जी का सपना था — “ज्ञान आधारित समाज”, जहां शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित न होकर मानव चेतना के पूर्ण विकास का माध्यम बने।
इस अवसर पर अतिथियों में सांसद प्रतिनिधि पद्येश गौतम, पूर्व जिला मंत्री विजय दुबे,भाजपा मंडल अध्यक्ष आशीष चौरसिया, समाजसेवी राजेश व्यौहार, गोविंद प्रताप सिंह, जनपद अध्यक्ष सुनीता संतोष दुबे, खेल समिति अध्यक्ष आशीष चौरसिया, प्रदीप चौरसिया सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने महर्षि जी के विचारों को आज के समय में और अधिक प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि तनाव, हिंसा और अशांति से जूझती वर्तमान दुनिया के लिए महर्षि का संदेश एक प्रकाश स्तंभ के समान है।
कार्यक्रम में आश्रम प्रभारी रतीभान सिंह, व्यवस्था प्रभारी बलराम भारद्वाज, रामदरस यादव सहित आश्रम के वेदपाठी ब्राह्मण छात्र, आचार्यगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मीडिया प्रतिनिधियों में राजेंद्र चौरसिया एवं राकेश यादव सहित अन्य गणमान्य नागरिकों की विशेष उपस्थिति रही।

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