तंबाकू छोड़ो, जिंदगी जोड़ो”: विश्व कैंसर दिवस पर गांव-गांव जागरूकता की अलख उमरिया पान से ढीमरखेड़ा व अनेकों गांव में स्वास्थ्य अमले का अभियान, बीएमओ बी.के. प्रसाद की सराहनीय पहल
कलयुग की कलम से राकेश यादव

“तंबाकू छोड़ो, जिंदगी जोड़ो”: विश्व कैंसर दिवस पर गांव-गांव जागरूकता की अलख उमरिया पान से ढीमरखेड़ा व अनेकों गांव में स्वास्थ्य अमले का अभियान, बीएमओ बी.के. प्रसाद की सराहनीय पहल
कलयुग की कलम उमरिया पान -विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उमरिया पान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं ढीमरखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अनेकों गांव में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. बी.के. प्रसाद ने अपनी पूरी स्वास्थ्य टीम के साथ किया।
स्वास्थ्य अमले ने अस्पताल परिसरों के साथ-साथ गांव-गांव पहुंचकर लोगों को यह समझाया कि तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थ किस प्रकार कैंसर और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। “तंबाकू नहीं खाना है, कैंसर को भगाना है” जैसे प्रभावशाली नारों के माध्यम से आमजन को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
कैंसर: समय पर पहचान से बचाई जा सकती है जिंदगी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि कैंसर कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई प्रकार की बीमारियों का समूह है, जो शरीर की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि के कारण होता है। विशेषज्ञों ने समझाया कि मुंह, फेफड़े, गला, पेट और स्तन कैंसर के प्रमुख कारणों में तंबाकू और धूम्रपान सबसे आगे हैं।
स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को यह भी बताया कि कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय रहते जांच व इलाज से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
नशा छोड़ने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान लोगों को न केवल जानकारी दी गई, बल्कि उन्हें नशा छोड़ने का संकल्प भी दिलाया गया। स्वास्थ्य टीम ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ जीवनशैली, नियमित जांच और सही खानपान से कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाव संभव है।
बीएमओ की सक्रियता की हुई सराहना
स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने बीएमओ डॉ. बी.के. प्रसाद की सक्रिय भूमिका की खुले तौर पर सराहना की। उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम जिस तरह जमीनी स्तर पर पहुंचकर लोगों को जागरूक कर रही है, वह निश्चित रूप से समाज को स्वस्थ दिशा में ले जाने का प्रयास है।
विश्व कैंसर दिवस पर चला यह अभियान न केवल जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर गया कि नशा छोड़ना ही कैंसर से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।



