चैत्र नवरात्र के पर्व पर भक्तों की अपार भीड़ ढीमरखेड़ा के कचनारी- पाली स्थित विरासन मंदिर में मातारानी की पूजा अर्चना के लिए पहुंचती है श्रद्धालुओं की भीड़ 24 भुजाओं वाली विरासन माता श्रद्धालुओं को उधार देती थी पैसे, ब्याज सहित करना पड़ता था वापस
कलयुग की कलम से राकेश यादव

चैत्र नवरात्र के पर्व पर भक्तों की अपार भीड़ ढीमरखेड़ा के कचनारी- पाली स्थित विरासन मंदिर में मातारानी की पूजा अर्चना के लिए पहुंचती है श्रद्धालुओं की भीड़ 24 भुजाओं वाली विरासन माता श्रद्धालुओं को उधार देती थी पैसे, ब्याज सहित करना पड़ता था वापस
कलयुग की कलम उमरिया पान –ढीमरखेड़ा तहसील स्थित पाली कचनारी में मां विरासन के दरबार में भक्तों का तांता लगा रहता है।नौ दिन तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान माता के दरबार में भक्तों की अपार भीड़ मातारानी के पूजा अर्चना के लिए पहुंचती है।सुबह से ही माता के श्रद्धालु मंदिर में पहुँच जाते है। रात तक श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति यदि गांव के बाहर रहता है, लेकिन नवरात्र में वह माता के दरबार में हाजिरी लगाने जरूर आता है।

ढीमरखेड़ा तहसील के कचनारी- पाली गांव के जंगली क्षेत्र में स्थित विरासन माता का प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर में 24 भुजाओं वाली अद्भुत विरासन माता विराजी है।मंदिर में प्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों से श्रद्धालुओं अपनी मनोकामना लेकर आते है। माता के दरबार में जो भी श्रद्धालु अपनी अर्जी लगाता है, वह पूरी होती है। इस कारण से भी मंदिर में चैत्र और शारदेय नवरात्र में भारी भीड़ रहती है।


मंदिर में जवारें भी बोए गए हैं।विसर्जन के दिन तो श्रद्धालुओं की और भी ज्यादा भीड़ रहती है। प्रशासन के साथ पुलिस को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।माता के मंदिर की ख्याति दूर दूर तक प्रसिद्ध है।इसके चलते माता के मंदिर में 12 महीने श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। शहडोल जिले के बिरसिंहपुर पाली में अष्टभुजी विरासन माता की प्रतिमा है और छत्तीसगढ़ के हरवाह में दो भुजाओं वाली विरासन माता की प्रतिमा स्थापित है।इस लिहाज से ढीमरखेड़ा के कचनारी-पाली में विराजी विरासन माता अपने आप में अद्भुत है। मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना है। बताया जाता है कि पहले मंदिर घने जंगल के बीच रहा। धीरे धीरे मंदिर का स्वरूप बदलता गया। अब तो मंदिर की भव्यता और भी बढ़ गई है।मंदिर में धार्मिक आयोजन होते रहते है।मंदिर के आसपास खुदाई में पुराना कुआं व मंदिर के अवशेष भी निकले थे। देवी देवताओं की अन्य प्रतिमाएं भी निकली है। मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि पहले विरासन माता श्रद्धालुओं को उधारी में रुपये पैसा प्रदान करती थीं, लेकिन काम पूरा होने के बाद ब्याज के साथ रुपये-पैसे रखकर श्रद्धालुओं को वापस करना होता था।लेकिन कुछ श्रद्धालुओं ने माता से पैसे लेकर वापस नहीं किया, इस कारण अब माता ने रुपये पैसे देना बंद कर दिया है। लेकिन जो भी श्रद्धालु अपनी मन्नत लेकर आता है, माता उसकी मनोकामना पूर्ण करती है। विरासत माता में 9 दिन तक चलने वाला यह चैत्र नवरात्र का पर्व जवारे विसर्जन के साथ समाप्त होगा।



