आस्थामध्यप्रदेश

नंद के आनंद भयो…” से गूंज उठा घुघरी श्रीमद्भागवत कथा में बाल संत ब्रह्मानंद दास जी ने सुनाई कृष्ण जन्म की दिव्य लीला

कलयुग की कलम से राकेश यादव

नंद के आनंद भयो…” से गूंज उठा घुघरी श्रीमद्भागवत कथा में बाल संत ब्रह्मानंद दास जी ने सुनाई कृष्ण जन्म की दिव्य लीला

कलयुग की कलम उमरिया पान -घुघरी ग्राम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक रस का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा व्यास बाल संत श्री ब्रह्मानंद दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की अलौकिक लीला का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि पूरा पंडाल भक्ति भाव से सराबोर हो गया। जैसे ही कृष्ण जन्म का प्रसंग आया, श्रद्धालुओं की आंखें भावविभोर हो उठीं और वातावरण “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा।

महाराज जी ने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के पावन संयोग में भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ। अंधकार, भय और अत्याचार के वातावरण में प्रकट होकर भगवान ने संसार को यह संदेश दिया कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर धर्म की रक्षा के लिए स्वयं अवतरित होते हैं।

कथा के दौरान महाराज श्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार कंस के पापों के अंत और धरती पर धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ। कारागार में जन्म लेने के बाद वासुदेव जी योगमाया की सहायता से बालकृष्ण को गोकुल ले गए और उन्हें नंदबाबा एवं यशोदा मैया के आंगन में सौंप दिया। इसके बाद गोकुल में नंदोत्सव की धूम मच गई। ढोल-नगाड़ों, मंगल गीतों और भजनों से पूरा गोकुल आनंद में झूम उठा—इसी भाव को कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने साक्षात अनुभव किया।

महाराज ब्रह्मानंद दास जी ने भक्तों को आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्म कथा सुनने का वास्तविक उद्देश्य केवल कथा श्रवण नहीं, बल्कि अपने मन रूपी कारागार को तोड़कर उसमें भगवान का प्राकट्य करना है। जब मन से अहंकार, भय और विकार दूर होते हैं, तभी हृदय में श्रीकृष्ण का जन्म होता है।

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच पंजीरी, पंचामृत एवं माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को नंदोत्सव की बधाइयाँ दीं और भक्ति भाव के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते हुए कथा स्थल से विदा ली।

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