ढीमरखेड़ा में न्यायाधीश सुश्री पूर्वी तिवारी की पहल: आंगनवाड़ी प्ले स्कूल में विधिक साक्षरता शिविर व भोजन गुणवत्ता निरीक्षण
कलयुग की कलम जिला ब्यूरो गोकुल दीक्षित

ढीमरखेड़ा में न्यायाधीश सुश्री पूर्वी तिवारी की पहल: आंगनवाड़ी प्ले स्कूल में विधिक साक्षरता शिविर व भोजन गुणवत्ता निरीक्षण
कलयुग की कलम उमरिया पान -म०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के पालन में, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जीतेन्द्र कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में ढीमरखेड़ा की न्यायाधीश सुश्री पूर्वी तिवारी द्वारा आंगनवाड़ी प्ले स्कूल ढीमरखेड़ा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बच्चों के पोषण, शिक्षा और विद्यालयीन व्यवस्थाओं का सूक्ष्म निरीक्षण करते हुए भोजन की गुणवत्ता का भी परीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश सुश्री तिवारी ने आंगनवाड़ी केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था तथा बच्चों को प्रदान किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को बच्चों के पोषण स्तर और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने हेतु आवश्यक निर्देश भी दिए।
शिविर के दौरान बच्चों की सहभागिता विशेष रूप से उत्साहजनक रही। नन्हे बच्चों से पीटी एवं प्रार्थना कराई गई, जिससे उनमें अनुशासन और सामूहिक भावना का विकास हो सके। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा बच्चों को 1, 2, 3, 4 की संख्याओं का अभ्यास कराया गया, जिसे बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ दोहराया। इसके साथ ही बच्चों ने कविताओं और छोटी कहानियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिससे वातावरण आनंदमय और प्रेरणादायी बन गया।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों द्वारा “भारत माता की जय” के उद्घोष से पूरे परिसर में देशभक्ति का माहौल निर्मित हो गया। न्यायाधीश सुश्री पूर्वी तिवारी ने बच्चों के आत्मविश्वास और प्रस्तुति की सराहना करते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं स्टाफ को उनके समर्पण के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों में विधिक साक्षरता और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रमों से न केवल बच्चों के समग्र विकास को बल मिलता है, बल्कि अभिभावकों और समुदाय में भी शिक्षा एवं विधिक जागरूकता का संदेश पहुंचता है।
यह पहल न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता के आकलन का माध्यम बनी, बल्कि बाल शिक्षा, पोषण और विधिक जागरूकता को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम भी साबित हुई। स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।



