ढीमरखेड़ा में नवीन जनपद भवन को लेकर भूमि विवाद,देश के हृदय स्थल माने जाने वाले केंद्र बिंदु ग्राम करौंदी में स्थानांतरित कर निर्माण की उठी मांग
कलयुग की कलम से राकेश यादव

ढीमरखेड़ा में नवीन जनपद भवन को लेकर भूमि विवाद,देश के हृदय स्थल माने जाने वाले केंद्र बिंदु ग्राम करौंदी में स्थानांतरित कर निर्माण की उठी मांग
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा — जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के लिए निर्मित नवीन जनपद भवन एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। सवा पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला भवन जिस भूमि पर बनाया जाना है, उस पर अब आपत्ति दर्ज कराई गई है। बताया जा रहा है कि जनपद भवन के लिए महात्मा गांधी खेल मैदान की भूमि निर्धारित हुई थी।
्सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर इस भूमि को जनपद भवन के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन अब इसे लेकर आपत्तियां सामने आने के बाद जमीन की स्थिति पर संशय उत्पन्न हो गया है। दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि भूमि की वैधानिक स्थिति स्पष्ट न होने के कारण भविष्य में कानूनी अड़चनें उत्पन्न हो सकती हैं।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद निजी क्षेत्र और स्थानीय नागरिकों में असंतोष देखा जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ढीमरखेड़ा में वर्तमान में जनपद भवन के लिए उपयुक्त एवं विवाद रहित भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बिना पूरी जांच-पड़ताल के निर्माण या उपयोग करना जनहित के साथ अन्याय होगा।
इसी बीच निजी क्षेत्र से यह मांग भी उठने लगी है कि नवीन जनपद भवन को देश के हृदय स्थल माने जाने वाले केंद्र बिंदु ग्राम करौंदी में स्थानांतरित कर निर्माण कराया जाए। मांगकर्ताओं का तर्क है कि करौंदी भौगोलिक रूप से विकासखंड के केंद्र में स्थित है, जिससे आसपास की सभी पंचायतों और ग्रामीणों के लिए पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही वहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने की बात भी कही जा रही है, जिससे भविष्य में किसी प्रकार का भूमि विवाद नहीं रहेगा।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि करौंदी में सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाएं बेहतर हैं, जो एक प्रशासनिक मुख्यालय के लिए आवश्यक मानी जाती हैं। यदि जनपद भवन का निर्माण वहां किया जाता है तो आम जनता को प्रशासनिक कार्यों के लिए कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा।अब क्षेत्र की नजरें प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं। जनपद भवन की भूमि को लेकर उठे सवालों के बीच यह आवश्यक हो गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जनहित में अंतिम फैसला लिया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न उत्पन्न हो।



