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जबलपुर शहर में काली फिल्म लगी गाड़ियों की भरमार, नियमों की उड़ रही खुलेआम धज्जियां..

कलयुग की कलम से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

जबलपुर शहर में इन दिनों काली (डार्क) सनफिल्म लगी गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। शहर की सड़कों पर दौड़ती कई कारों के शीशे इतने काले हैं कि अंदर बैठे लोग तक दिखाई नहीं देते, जो न सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन है बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद खुलेआम काली फिल्म लगी गाड़ियाँ सड़कों पर चल रही हैं। नियमों के अनुसार विंडस्क्रीन पर 70 प्रतिशत और साइड ग्लास पर 50 प्रतिशत से कम दृश्यता वाली फिल्म प्रतिबंधित है, इसके बावजूद शहर के प्रमुख मार्गों, बाजारों और वीआईपी इलाकों में नियमों की अनदेखी साफ नजर आ रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि काली फिल्म लगी गाड़ियों में अपराध की आशंका अधिक रहती है, क्योंकि अंदर बैठे लोगों की पहचान नहीं हो पाती। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। वहीं ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई को लेकर आमजन में नाराज़गी है—लोगों का आरोप है कि अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाता है।

जरूरत इस बात की है कि यातायात पुलिस सख्ती से अभियान चलाए, काली फिल्म लगी गाड़ियों पर भारी जुर्माना और कार्रवाई करे, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके और शहर की सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके।

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