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रसायन छोड़ प्रकृति का साथ:किसानों के लिए बना प्रेरणा केंद्र, परसेल के किसान केसलाल सिंह ने जैविक खेती से लिखी सफलता की नई कहानी

कलयुग की कलम से राकेश यादव

रसायन छोड़ प्रकृति का साथ:किसानों के लिए बना प्रेरणा केंद्र, परसेल के किसान केसलाल सिंह ने जैविक खेती से लिखी सफलता की नई कहानी

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – ढीमरखेड़ा विकासखंड के ग्राम परसेल के प्रगतिशील किसान केसलाल सिंह ने प्राकृतिक खेती अपनाकर यह साबित कर दिया है कि बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। उनकी मेहनत और सोच आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।

उड़द की खेती में अपनाई पूरी तरह जैविक पद्धति

इस सीजन में केसलाल सिंह ने अपनी उड़द की फसल में यूरिया, डीएपी और अन्य रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया। उन्होंने खेत की उर्वरता बढ़ाने के लिए गोबर खाद, जैविक पोषक तत्वों और पारंपरिक बीजों का इस्तेमाल किया। प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित इस पद्धति से खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।

मार्गदर्शन से बदली खेती की दिशा

केसलाल सिंह को इस नई पहल में मानव जीवन विकास समिति का निरंतर सहयोग मिला। समिति की टीम ने उन्हें जैविक खाद तैयार करने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीके बताए। नियमित निरीक्षण और तकनीकी सलाह से उन्हें आत्मविश्वास मिला और उन्होंने पूरी तरह प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाया।

लहलहा रही फसल, बढ़ी उम्मीदें

वर्तमान में खेत में उड़द की फसल स्वस्थ और हरी-भरी दिखाई दे रही है। फसल की स्थिति देखकर बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। रासायनिक खर्च से बचत होने के साथ-साथ मिट्टी की संरचना और जल धारण क्षमता में भी सुधार देखा गया है।

तीन बड़े फायदे

रासायनिक खाद और दवाओं पर खर्च में कमी

सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन

भूमि की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण

किसानों के लिए बना प्रेरणा केंद्र

केसलाल सिंह के खेत को देखने आसपास के गांवों के किसान पहुंच रहे हैं। कई किसान अब प्राकृतिक खेती अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि खेती केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाने का रास्ता भी है।

प्रकृति से जुड़ने का संदेश

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी की सेहत बचाना भविष्य की खेती के लिए सबसे जरूरी है। जैविक खेती न केवल लागत घटाती है, बल्कि किसानों को टिकाऊ और स्वस्थ कृषि की दिशा में आगे बढ़ाती है।

ग्राम परसेल के किसान केसलाल सिंह ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो खेतों में रसायनों के बिना भी समृद्धि की फसल उगाई जा सकती है।

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