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मध्यप्रदेश की ढीमरखेड़ा अदालत का ऐतिहासिक फैसला पेंगोलिन तस्करी पर सख्त प्रहार कटनी में चार आरोपियों को 9 वर्ष तक का कठोर कारावास, भारी जुर्माना भी

कलयुग की कलम से राकेश यादव

मध्यप्रदेश की ढीमरखेड़ा अदालत का ऐतिहासिक फैसला पेंगोलिन तस्करी पर सख्त प्रहार कटनी में चार आरोपियों को 9 वर्ष तक का कठोर कारावास, भारी जुर्माना भी

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – 30 जनवरी 2026 कुंडम परियोजना मंडल के परियोजना परिक्षेत्र रामपुर में पंजीबद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 183/2072 (दिनांक 21 अगस्त 2024) में माननीय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी श्रीमती पूर्वा तिवारी ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया है।

इस प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों—प्रेमचंद बैगा (पिता विश्राम बैगा) एवं कनछेदी बैगा (पिता प्रेमचंद बैगा), निवासी ग्राम अमराडांड, थाना बड़वारा, जिला कटनी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 39, 48-ए, 49-बी सहपठित धारा 52 के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर 9-9 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 75-75 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया।

वहीं अन्य आरोपी सूरज गोंड (पिता चंद्रभान गोंड), निवासी ग्राम रोझन, थाना ढीमरखेड़ा तथा जगना सिंह गोंड उर्फ जगन (पिता जुगराज), निवासी ग्राम टिकरिया, थाना स्लीमनाबाद को 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 25-25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई।

अवैध तस्करी और योजनाबद्ध अपराध सिद्ध

अदालत में यह सिद्ध हुआ कि आरोपियों द्वारा संकटग्रस्त वन्यप्राणी पेंगोलिन को अवैध रूप से अपने पास रखना, उसका परिवहन करना, अपराध के लिए दुष्प्रेरण करना तथा योजनाबद्ध तरीके से वन्यप्राणी का अवैध व्यापार किया गया।

उल्लेखनीय है कि पेंगोलिन अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में संकटापन्न प्रजाति के रूप में दर्ज है, जिसके संरक्षण को लेकर कानून अत्यंत कठोर है।

वन विभाग की मुस्तैदी से मिली सफलता

इस कार्रवाई में मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम, कुंडम परियोजना मंडल की टीम की अहम भूमिका रही। वनरक्षक अभिषेक शुक्ला, लोकेश सिंह ठाकुर, क्षेत्ररक्षक राहुल सेन एवं शिवम चक्रवर्ती का विशेष योगदान उल्लेखनीय रहा।

प्रकरण की मुख्य विवेचना देवेश खराड़ी द्वारा की गई।

न्यायालय में शासन पक्ष की ओर से मंजुला श्रीवास्तव (विशेष लोक अभियोजक) एवं विनोद लोधी (सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी) ने सशक्त पैरवी प्रस्तुत की।

मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक फैसला

यह निर्णय इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 के तहत बढ़े हुए अर्थदंड प्रावधान तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी के विस्तारित अर्थदंड अधिकार लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में इस प्रकार का यह पहला दंडादेश है।

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