अंतरराष्ट्रीय सहकारिता किसान सम्मेलन ढीमरखेड़ा में कार्यशाला का भव्य आयोजन “बिना सहकार नहीं उद्धार” के गूंजे नारे: किसान सम्मेलन से एकजुटता और आत्मनिर्भरता का संदेश
कलयुग की कलम से राकेश यादव

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता किसान सम्मेलन ढीमरखेड़ा में कार्यशाला का भव्य आयोजन “बिना सहकार नहीं उद्धार” के गूंजे नारे: किसान सम्मेलन से एकजुटता और आत्मनिर्भरता का संदेश
कटनी।
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड स्थित बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति परिसर में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता किसान सम्मेलन एवं कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी शामिल हुए और सहकारिता को सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत उत्साहपूर्ण रैली से हुई, जिसमें “बिना सहकार नहीं उद्धार”, “जय हिंद, जय भारत” और “भारत माता की जय” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। रैली ने सहकारिता आंदोलन के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी संदेश दिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत की सहकारिता एवं उद्योग समिति की सभापति कविता पंकज राय रहीं। उन्होंने पुष्प वर्षा कर अतिथियों एवं किसानों का स्वागत किया और सहकारिता को किसानों की मजबूती का आधार बताते हुए इससे जुड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सहायक आयुक्त सहकारिता राजयशवर्धन कुरील ने सहकारिता की योजनाओं, सिद्धांतों और किसानों को मिलने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी। वहीं विशिष्ट अतिथि सतीष ज्योति ज्योतिषी ने किसानों को सहकारी संस्थाओं से जुड़कर अधिकतम लाभ लेने के उपाय समझाए।
कार्यक्रम का संचालन अंकेक्षण अधिकारी विजय मिश्रा ने किया। अंत में बी-पैक्स समिति ढीमरखेड़ा की प्रशासक बैबी नैना मेहरा ने सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों एवं किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर नरेन्द्र त्रिपाठी, आशीष चौरसिया, दुर्गा पारस पटेल, राजा चौरसिया, अनिल बागरी,रमन शुक्ला, विनय ज्योतिषी, दीपू बैरागी, बसंत मिश्रा, शंकर तिवारी, ब्रजेश पटेल, प्रमोद गौतम सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण से किया गया।
सहकारिता विभाग की ओर से अनीता कोल, आयुष गुप्ता, पूजा विश्वकर्मा, रामचंद्र अहिरवार, नितिन जैन, रवि तिवारी, संजय पाण्डेय एवं शिव स्वरूप शुक्ला सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना एवं शासकीय योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाना रहा। यह आयोजन क्षेत्र में सहकारिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और किसानों को संगठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।



