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ग्राम पंचायत उमरियापान बना भ्रष्टाचार का अड्डा, सफाई के नाम पर लाखों के बिल, न्यू बस स्टैंड में गंदगी का अंबार

कलयुग की कलम से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी- जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत उमरियापान इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। पंचायत में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, जबकि दूसरी ओर सफाई के नाम पर लाखों रुपये के बिल लगाए जाने की चर्चा जोरों पर है। हालात यह हैं कि ग्राम पंचायत के न्यू बस स्टैंड क्षेत्र में गंदगी का अंबार लगा हुआ है, लेकिन सफाई की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। इससे ग्रामीणों, यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत द्वारा नियमित रूप से सफाई कार्यों के नाम पर राशि खर्च होने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। बस स्टैंड परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र कूड़े-कचरे से भरा पड़ा है।जगह-जगह गंदगी, प्लास्टिक, सड़ी-गली सामग्री और नालियों में जमा कचरा साफ तौर पर देखा जा सकता है। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता सवाल खड़े कर रही है।

न्यू बस स्टैंड में गंदगी से लोग परेशान

उमरियापान का न्यू बस स्टैंड क्षेत्र आसपास के कई गांवों के लिए मुख्य आवागमन केंद्र है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों यात्री आते-जाते हैं। इसके अलावा बस स्टैंड के आसपास कई छोटी-बड़ी दुकानें और ठेले भी संचालित होते हैं। लेकिन सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने के कारण यहां आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बस स्टैंड परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। नालियां कचरे से भरी पड़ी हैं, जिससे बदबू फैल रही है। बरसात के दिनों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि पानी के साथ गंदगी फैलकर पूरे क्षेत्र में बीमारी फैलने का खतरा पैदा कर देती है। यात्रियों का कहना है कि कई बार उन्होंने पंचायत से सफाई करवाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सफाई के नाम पर लाखों के बिल का आरोप

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत में सफाई व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये के बिल लगाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम कहीं दिखाई नहीं देता। पंचायत के दस्तावेजों में नियमित सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए राशि खर्च होने का उल्लेख किया जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि महीनों तक सफाई कर्मचारी दिखाई ही नहीं देते। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत में सफाई के नाम पर केवल कागजों में काम दिखाकर भुगतान कर लिया जाता है। यदि वास्तव में इतनी बड़ी राशि सफाई पर खर्च हो रही है, तो फिर बस स्टैंड और गांव की सड़कों पर इतनी गंदगी क्यों दिखाई देती है यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा

गंदगी के कारण क्षेत्र में बीमारी फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। खुले में पड़े कचरे के कारण मच्छर और मक्खियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड के पास ही कई दुकानों में खाने-पीने का सामान भी बिकता है। गंदगी और बदबू के कारण वहां आने वाले लोगों को काफी दिक्कत होती है। कई बार बाहर से आने वाले यात्रियों को भी इस स्थिति के कारण शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही सफाई की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

कई बार की गई शिकायत, नहीं हुई सुनवाई

ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। शिकायतों के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। कुछ लोगों का कहना है कि पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामले को टाल देते हैं। वहीं कई बार सफाई कर्मचारियों को भेजने की बात कही जाती है, लेकिन वास्तविकता में सफाई कार्य नियमित रूप से नहीं हो पाता। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

ग्राम पंचायत उमरियापान में सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल अब पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि पंचायत द्वारा सफाई के लिए बजट खर्च किया जा रहा है, तो उसका लाभ ग्रामीणों को क्यों नहीं मिल रहा यह एक बड़ा प्रश्न बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर भी कई बार अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति ने इन आरोपों को और मजबूत कर दिया है।

जांच की मांग तेज

गांव के जागरूक नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत में सफाई के नाम पर लगाए गए बिलों और वास्तविक कार्यों की जांच कराई जानी चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पंचायत में पारदर्शिता लाने के लिए सभी खर्चों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि उनके गांव के विकास के लिए आने वाला पैसा वास्तव में कहां खर्च हो रहा है।

प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद

गांव के लोगों को अब जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से कार्रवाई की उम्मीद है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उच्च अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हैं और मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करते हैं, तो वास्तविकता सामने आ सकती है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि न्यू बस स्टैंड सहित पूरे गांव में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सफाई के नाम पर किए गए खर्च की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताएं न हो सकें।

जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों और कस्बों में साफ-सफाई केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। यदि समय पर कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था नहीं की जाती, तो इससे कई प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं। उमरियापान के न्यू बस स्टैंड की वर्तमान स्थिति भी इसी खतरे की ओर संकेत कर रही है। यदि जल्द ही यहां सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है।

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