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ढीमरखेड़ा–मुरवारी : छात्रों को मिला आधुनिक खेती का व्यावहारिक ज्ञान पाली हाउस, टपक सिंचाई व मल्चिंग तकनीक से कृषि को बनाया लाभ का माध्यम

कलयुग की कलम से राकेश यादव

ढीमरखेड़ा–मुरवारी : छात्रों को मिला आधुनिक खेती का व्यावहारिक ज्ञान पाली हाउस, टपक सिंचाई व मल्चिंग तकनीक से कृषि को बनाया लाभ का माध्यम

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा -ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विकासखंड ढीमरखेड़ा के शासकीय आर.के. गौतम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुरवारी में कृषि विषय का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को संरक्षित खेती, पाली हाउस, टपक सिंचाई एवं प्लास्टिक मल्चिंग पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।कार्यक्रम विद्यालय के प्राचार्य संघ रत्न भेलावे के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे ने विद्यार्थियों को आधुनिक, कम लागत और अधिक लाभ देने वाली कृषि तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी।

संरक्षित खेती : कम जमीन, ज्यादा उत्पादन

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि संरक्षित खेती ऐसी उन्नत तकनीक है, जिसमें फसल के वातावरण को आंशिक अथवा पूर्ण रूप से नियंत्रित कर सीमित भूमि से अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन लिया जा सकता है। पाली हाउस में तापमान, नमी, प्रकाश जैसी परिस्थितियों पर नियंत्रण रखकर वर्षभर खेती संभव होती है।

पाली हाउस में बेमौसमी सब्जियों की खेती

विशेषज्ञ ने बताया कि खुले खेतों में मौसम के कारण जहां उत्पादन सीमित रहता है, वहीं पाली हाउस में सब्जियों को सुरक्षित वातावरण में उगाकर बेमौसमी उत्पादन लिया जा सकता है। इससे किसानों को प्रतिकूल मौसम से सुरक्षा के साथ बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।

टपक सिंचाई से जल संरक्षण और लागत में कमी

टपक सिंचाई प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया गया कि इस विधि में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद पहुंचता है। इससे

80 से 90 प्रतिशत तक पानी की बचत उर्वरक सीधे जड़ों तक पहुंचते हैं खरपतवार नियंत्रण में मदद नमी संरक्षण श्रम व सिंचाई लागत में कमी जैसे लाभ मिलते हैं।

मल्चिंग तकनीक से गुणवत्ता और उत्पादन में बढ़ोतरी

प्रशिक्षण में प्लास्टिक मल्चिंग (आच्छादन) के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है, खरपतवार नहीं उगते, मृदा तापमान नियंत्रित रहता है तथा पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है। मल्चिंग तकनीक जीरो बजट फार्मिंग, कम लागत खेती और शुष्क भूमि क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी बताई गई।

विद्यार्थियों में बढ़ा कृषि को करियर बनाने का उत्साह

इस प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और भविष्य में कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखने की सोच विकसित हुई। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के व्यावसायिक शिक्षक महेंद्र दोहरे का विशेष सहयोग रहा।

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