मध्यप्रदेश

शनिवार और रविवार को भी होगा किसानों को निजी विक्रेताओं के यहाँ डीएपी का वितरण- कलेक्टर श्री दीपक सक्सेना

कलयुग की कलम से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

जबलपुर- कलेक्टर श्री दीपक सक्सेना के निर्देशानुसार मटर एवं गेहूं की लगातार हो रही बोनी को दृष्टिगत रखते हुए जिले में उर्वरक के निजी विक्रताओं के यहां उपलब्ध डीएपी का किसानों को इस शनिवार एवं रविवार को भी वितरण किया जायेगा। निजी विक्रेताओं के प्रतिष्ठासनों से किसानों को शनिवार और रविवार को डीएपी का वितरण कृषि विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में ही किया जायेगा।
उप संचालक कृषि डॉ एस के निगम के मुताबिक जिले में विंध्या ट्रेडर्स जबलपुर में 65 मीट्रिक टन, अभिषेक फर्टिलाइजर्स पनागर में 15 मीट्रिक टन, सात्विक फर्टिलाइजर्स में 70 मीट्रिक टन, बद्री नारायण फर्टिलाइजर्स सहजपुर में 7.50 मीट्रिक टन, मधु फर्टिलाइजर्स में 15 मीट्रिक टन, राजेन्द्र एंड कंपनी शहपुरा में 25 मीट्रिक टन, रोहित फर्टिलाइजर्स जबलपुर में 25 मीट्रिक टन, साहू ब्रदर्स गोसलपुर में 60 मीट्रिक टन, श्री बजरंग फर्टिलाइजर्स जबलपुर में 40 मीट्रिक टन, सुहाने एग्रो जबलपुर में 25 मीट्रिक टन, सिद्धि विनायक सिहोरा में 21.40 मीट्रिक टन, आज्ञा कृषि केंद्र उड़ना में 75 मीट्रिक टन, किसान सुविधा केन्द्र सूखा में 10 मीट्रिक टन एवं ग्रेट इंडिया गोसलपुर में 15 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है।
उपसंचालक कृषि के अनुसार किसान शनिवार और रविवार को भूमि के अभिलेख (B-1) एवं आधार कार्ड की प्रति लेकर इन निजी विक्रेताओं से सीधे डीएपी क्रय कर सकते हैं। डीएपी प्राप्त करने किसानों को स्वयं इन निजी विक्रेताओं के प्रतिष्ठान पर उपस्थित होना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि एक एकड़ पर 1 बोरी डीएपी एवं अधिकतम 20 बोरी डीएपी रकबे के आधार पर कृषि विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में विक्रय किया जायेगा।

जिले में खाद की कोई समस्‍या नहीं है

उपसंचालक कृषि ने बताया कि जिले के डबल लॉक में वर्तमान स्थिति में 2622 मीट्रिक टन यूरिया, 1311 मीट्रिक टन डीएपी, 1279 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्‍ध है। जिले में खाद की कोई समस्‍या नहीं है। कलेक्‍टर ने जिले के विभिन्न डबल लॉक केन्द्रों से डीएपी खाद वितरण की नई व्‍यवस्‍था 13 नवम्‍बर से शुरू की है, जिससे किसानों को लाइन में नहीं लगना पड़ रहा है। इस नवीन व्यवस्था में “लाइन” के स्थान पर “लॉटरी” से डीएपी खाद का वितरण किया जा रहा है जिससे किसानों को लंबी-लंबी लाइन में लगने की समस्या से निजात मिल गई है।

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